akbar birbal story in hindi अकबर और बीरबल की नजरिया hindi story

अकबर बीरबल की कहानियाँ(akbar birbal story in hindi) बहुत ही मजदार और नैतिक के साथ होती है। अकबर बीरबल की कहानियाँ (akbar birbal story in hindi)बहुत से है।  बच्चे अकबर बीरबल की कहानियाँ पढ़ना पसंद करते है।

अकबर और बीरबल की नजरिया

एक बार की बात है। अकबर का दरबार लगा थाअकबर के चेहरे पर खामोसी छाई हुई थी। तो यह देख कर दरबारियो ने पूछा। “जहापना क्या हुआ? आप इतने खामोश क्यों है?”

इस पर अकबर बोले, “मेरी खामोसी का कारण मेरा बेटा सलिम है। उसको अगुठा चुसने की आदत लग गई है। मुझे लगा था की वह बड़ा होगा तो यह आदत छोड़ देगा। पर ऐसा नही हो रहा है।”

आगे अकबर बोले, “हमारे सहजादे बहुत ही जिदी है, वह किसी की बात नही सुनते है।”

इस समस्या के हल के लिए दरबारियो ने अकबर को एक संत के बारे में बताया। उन दरबारियो ने कहा, संत आपके बेटे सलिम की यह आदत छुडा देगे।

अब राजा अकबर को अपनी समस्या का हल उस संत में दिखने लगा था।

राजा अकबर ने अपने सिपाहियो को हुकम दिया की उस संत को लाया जाये। अगले दिन दरबार में संत खुद हाजिर हुए।

अकबर ने संत से अपनी सारी समस्या कही। संत ने सारी बात सुनने के बाद कहा, “राजा मै आपके इस समस्या का हल एक सप्तहा बाद बताउगा।”

यह कहने के बाद वह संत दरबार छोड़ कर चले गए। एक सप्तहा पूरा होने के बाद वह संत फिर दरबार में आता है।

वह संत राजा अकबर से कहता है, “आप अपने बेटे सलिम को बुलाई।”

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सलिम को संत खेल-खेल में समझाते है की अगुठा चुसना कितना बुरा है। जो बाते संत कहा रहे थे वह सब बाते मामोली से थे।

फिर भी सलिम ने उस दिन से अगुठा चुसना छोड़ दिया। यह देखकर राजा अकबर बहुत खुश और नाराज भी हुए।

नाराज इस लिए क्योंकि जो बाते संत आज कह रहे थे वह बाते वह एक सप्तहा पहले भी कह सकते थे। जो बाते संत आज कहे वह कोइ बड़ी उपदेश तो न था।

इस लिए राजा ने सभा में उस संत को सजा देने का एलान किया। इसपर सभी दरबारियो ने हामी भरी।

जब अकबर ने बीरबल की और देखे तो वह बिकुल खामोस थे। तो अकबर ने बीरबल ने पुछा, “आप क्यों खामोस है। क्या आप को लगता है की संत ने जो किया है वह सही है?”

बीरबल दरबार में खड़े हुए और बोली, “जहापना आप जो सोच रहे है मै उसका उल्टा सोच रहा हु।”मुझे यकीं है की संत गलत नही है।

तो इस पर बीरबल काफी क्रोधित हुए। उन्होंने कहा, मेरे साथ गुस्ताखी। अगर आप को लगता है की संत ने कोई गलती नही कि है तो आप साबित करिये।”

फिर बिरबल बोले, “गुसताखी माफ़ हो, जिस दिन संत पहली बार दरबार आए थे और आप ने शहजादे की गलतियो की बात की थी। तब संत के हाथों में चुने की एक डिबिया थी, जिसमें से लगातार चुना निकाल कर वे खा रहे थे।

लेकिन आज उनके हाथ में कोई डिबिया नहीं हैं, क्यूंकि जब आप उनसे शहजादे की गलत आदत की बता कर रहे थे, तब ही उन्हे अपनी गलत आदत का अहसास हो गया और उन्होने एक हफ्ते का समय खुद को सुधारने के लिए मांगा और अपने आपको सुधारकर उन्होने आज सलीम को ज्ञान दिया”।

क्युकी वह खुद के अन्दर बदलाव ला चुके थे तब ही उनके बाते सहजादे के दिल पर लगी और उन्होंने अपनी आदत बदल ली।

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यह सुनने के बाद राजा अकबर कुछ देर खामोस रहे और बोले “बाह बीरबल बाह! आज फिर तुमने मुझसे एक गलती होने से बचा लिया।”

कहानी की सिख- हमें किसी को गलत ठहराने से पहले अच्छी तरह पूरी जाच कर लेनी चाहिए।

बीरबल राज्य में कितने कौवे है?

एक बार एक बढ़िया धूप के दिन में अकबर और बीरबल महल के बगीचों में इत्मीनान से टहल रहे थे। अकबर ने अचानक से बीरबल से एक कठिन सवाल पूछकर।

बीरबल की बुद्धिमत्ता का परीक्षण करने की सोची से। बादशाह ने बीरबल से पूछा, “हमारे राज्य में कुल कितने कौवे हैं?”

 यह सवाल सुनकर पहले कुछ देर बीरबल संत रहे। फिर बीरबल राजा अकबर से बोले, “मेरे राजा, हमारे राज्य में अस्सी हज़ार नौ सौ इक्यावन(80951) कौवे हैं।”

यह सुनकर राजा अकबर आश्चर्यचकित और रह गए। अकबर ने बीरबल को आगे बताया, “अगर हमारे पास अधिक कौवे हैं तो क्या होगा?”

बीरबल ने उत्तर दिया, “ओह, तो अन्य राज्यों के कौवे हमारे पास आए होगे”।

“क्या होगा अगर कम कौवे हैं?” अकबर ने पूछा।

“ठीक है, फिर हमारे कुछ कौवे अन्य राज्यों का दौरा कर रहे होंगे”, बीरबल ने उसके चेहरे पर मुस्कराहट के साथ उत्तर दिया।

अकबर ने बीरबल की हंसी और मजाक की भावना को देखकर मुस्कुरा दिया।

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कहानी की सीख- हम अपनी बुद्धि से कठिन से कठिन सवालों का हल निकाल सकते है।

मूर्ख चोर का डंडा बढ़ा क्या?

एक बार, राजा अकबर के राज्य में एक अमीर व्यापारी को लूट लिया गया था। दुखी व्यापारी ने अदालत में जाकर मदद की मांगी की। अकबर ने बीरबल से व्यापारी को डाकू को खोजने में मदद करने के लिए कहा।

व्यापारी ने बीरबल को बताया कि उसे अपने एक नौकर पर शक है। व्यापारी से संकेत मिलने पर, बीरबल ने सभी नौकरों को बुलाया और उन्हें एक सीधी रेखा में खड़े होने के लिए कहा।

जब डकैती के बारे में पूछा गया, तो सभी ने उम्मीद के मुताबिक इसे करने से इनकार कर दिया।

बीरबल ने फिर उन्हें एक लंबी सी छड़ी प्रत्येक को सौंप दी। बटने के बाद, बीरबल ने कहा, “कल तक, डाकू की छड़ी दो इंच बढ़ जाएगी”।

अगले दिन जब बीरबल ने सभी को बुलाया और उनके डंडे का निरीक्षण किया, तो एक नौकर की छड़ी दो इंच कम थी।

असली चोर को खोजने के रहस्य के बारे में व्यापारी द्वारा पूछे जाने पर, बीरबल ने कहा, “यह सरल था: चोर ने अपनी छड़ी को दो इंच काट दिया था, यह डर था कि यह आकार में बढ़ जाएगा”।

कहानी की सीख- कोई गलती करने के बाद हमें उसके सुबुत मिटाने की हरबदी होती है। हमें गलती करने से बचना चाहिए।

the moral of akbar birbal story in hindi is After making a mistake, we are forced to eradicate it. We should avoid making mistakes.

At the end

Akbar Birbal’s stories are very funny and moral. Akbar Birbal has many stories. Children like to read stories of Akbar Birbal. you can also read some more story like जानवरों की मानवता , ईश्वर के भरोसे, and नेवला और किसान की पत्नी कहानी

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