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बेस्ट हिंदी स्टोरी हिंदी में हिंदी स्टोरी ज्ञान से भरी हुई hindi moral story

हिंदी स्टोरी (hindi story) पढ़ना एक मजेदार काम से कम नहीं होता है। हिंदी स्टोरी कहे या फिर हिंदी कहानी कहे दोनों का मतलब एक ही है। हिंदी स्टोरी में बहुत ही स्टोरी होती है। हिंदी स्टोरी के स्टोरी का भाषा हिंदी होता है। हिंदी स्टोरी के बहुत से प्रकार होते है। हिंदी कहानी के कुछ ऐसे प्रकार भी होते है जो कहानी बच्चे के लिए लिखा जाता है। हिंदी स्टोरी (hindi story) और हिंदी कहानी में बहुत सी ज्ञान भरी होती है।

अच्छी हिंदी स्टोरी (hindi story) में बहुत सी ज्ञान मिलता है। दूसरे शब्दों में हिंदी स्टोरी (hindi story) ज्ञान का सागर होता है। इस सागर में आसान तरीके से अच्छी ज्ञान को दिया जाता है।

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मूर्ख दोस्त से अच्छा चालक दुश्मन -हिंदी स्टोरी

मूर्ख दोस्त से अच्छा चालक दुश्मन -हिंदी स्टोरी

एक बार कहीं दूर राज्य में एक राजा हुआ करता था। उस राजा को बन्दर से बहुत प्रेम था। वह राजा अपने पास बहुत सारा बंदर पाल रखा था। समय-समय पर जब भी बंदर का कोई नया नस्ल आता था, उसे भी राजा खरीद को पालता था। राजा अपना दिन का ज्यादा से ज्यादा समय बंदरो के साथ बिताया करता था।

राजा के सभी बन्दर में से एक बन्दर बहुत ही खास था। यह बंदर इंसान के काफी आदत को सीख लिया था। इस बन्दर में जीतनी भी आदतें थी वह इंसान की आदतें ही थी। अंतर बस इतना था कि वह एक बंदर था और इंसान के जैसा बोल नहीं सकता है। राजा इस बंदर को काफी प्रेम किया करता था। राजा अपने साथ इस बंदर को रखा करता था। हर समय यह बंदर राजा के साथ रहा करता था।

एक बार की बात है। गर्मी के मौसम में एक दिन राजा दोपहर में बड़े आनंद के साथ अपने बिस्तर पर लेटा हुआ था। राजा को गर्मी भी हो रही थी। इसलिए राजा को बंदर पंखे से हवा दे रहा था। बंदर के हाथ से हवा से राजा को आनंद भी आ रहा था। तभी कही से एक दो मखी आकर राजा के मुँह पर बैठने लगी।

इसको देखकर बंदर राजा के मुँह पर से मखी को भगा दिया। फिर से मखी राजा के मुँह पर आकर बैठई। राजा से गहरी नींद ने सो रहे थे। लेकिन राजा के नींद को यह कुछ मखी ख़राब कर सकती थी। इसलिए जब भी मखी राजा के मुँह पर आकर बैठती तो बंदर भगा देता। कुछ समय के बाद मखियों पर बंदर को बहुत ज्यादा गुस्सा आ गया।

बंदर ने सोचा कि क्यों न इन मखियों को ख़त्म ही कर दिया जाए। इसको सोचने के बाद बंदर ने राजा के म्यान में से तलवार को निकला और मखियों पर प्रहार कर दिया। तलवार के प्रहार का कोई भी असर मखियो पर न हुआ। लेकिन तलवार का प्रहार राजा के सर को शरीर से अलग कर दिया। इसलिए कहा जाता है कि मुर्ख दोस्त से अच्छा चालाक दुश्मन होता है।

इस हिंदी स्टोरी से सीख- हमें मूर्ख दोस्त रखने से अच्छा होता है कि हम चालक दुश्मन रखना चाहिए।

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बुरे काम का बुरा परिणाम -hindi story

बुरे काम का बुरा परिणाम -hindi story

एक गांव में एक रामू नाम का धोबी रहा करता था। रामू के पास एक गधा भी हुआ करता था। रामू सुबह होते ही कपडे को गधे पर लाद कर नदी की ओर चल जाया करता है। सारा दिन वह नदी के पास कपडे धोया करता था। उस नदी के पास गधे को खाने योग घास नहीं था।

जिसके कारण गधा कुछ भी खा नहीं पाता था।शाम के समय धोबी कुछ चारा गधे को खाने को दिया करता था लेकिन उस चारे से गधे का पेट नहीं भर पाता था। इसके कारण गधा दिन के साथ कमजोर होता जा रहा था। रामू इसको लेकर बहुत ही चिंतित रहता था। रामू सोचता था कि किस प्रकार से गधे के लिए भोजन का जुगाड़ किया जाए।

कुछ दिन सोचने के बाद रामू के दिमाग में एक योजना आया। रामू ने सोच कि यदि मैं इस गधे को बाघ का खोल पहना दू तो फिर मुझे इसके लिए भोजन की चिंता नहीं करना होगा। मैं रात के समय अपने गधे को छोड़ दिया करुँगा। रात भर में गधा पुर खेत में घूम कर अपना पेट भर लिया करेगा और ऐसे कोई भी मारने के बारे में भी नहीं सोच पाएगा।

अगले दिन धोबी ने ऐसा ही किया। वह बाजार से एक बाघ का खाल लेकर आया। जब शाम हुआ तब रामू ने गधे को बाघ का खाल पहना दिया और खेत में छोड़ दिया। रात भर में गधे ने अपना पेट भर लिया। सुबह होने से पहले गधा रामू के घर आ गया।

ऐसे ही कुछ समय बीता। अब रामू और गधा दोनों बहुत ही खुश थे। जिसका खेत वह गधा ख़राब करता था वह बहुत ही दुखी थे। एक रात जब गधा एक खेत में चर रहा था तब खेत का मालिक वहा आ पूछा। जब खेत के मालिक ने बाघ को देखा तो सिर पर पैर रखते हुए भगा।

कुछ समय के बाद उस खेत के मालिक ने तय कर लिया कि अपने खेत को बचाने के लिए वह कुछ भी करेगा। अगले रात को वह खेत में तीर-धनुष को लेकर बैठ गया। रात के समय गधा खेत में आ खड़ा हुआ। खेत के मालिक ने गधे को मारने के लिए गधे के पास जाने लगा।

गधे को लगा की कोई और गधा उस खेत में है। इसलिए गधा ढेँचू-ढेंचू करने लगा। ढेँचू-ढेंचू की आवाज सुनकर खेत का मालिक सब कुछ समझ गया। गधे को मारने के स्थान पर उसने गधे को पकड़ लिया। अगले दिन पंचायत हुई। पंचायत में फैसला हुआ कि जितना भी खेत बर्बाद हुआ है उसका भुकताना रामू धोबी करेगा और अब रामू इस गाँव में नहीं रहेगा।

इस हिंदी स्टोरी से सीख- बुरे काम का नतीजा ही होता है

हिंदी कहानी के नाम से ही कई लोग प्रेम करते है। हिंदी स्टोरी से प्रेम करना मलतब ज्ञान को आसानी के साथ सीखना होता है।

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सही समय पर सही फैसले का नतीजा

सही समय पर सही फैसले का नतीजा

आज से बहुत पहले की बात है। एक जंगल के पास एक तालाब हुआ करता था। उस तालाब के अन्य जीव के साथ तीन कछुवा भी रहते थे। उस तालाब में मछली बहुत ज्यादा रहती थी। सभी बहुत खुश रहते है। एक दिन की बात है। एक दिन कुछ मछुवारे उस जंगल की ओर आये। उनकी नजर उस तालाब की ओर पड़ी। वह तालाब के पास पहुंचे और तालाब को देखा। उस तालाब में मछली और कछुए देखकर मछुवारे बहुत ज्यादा खुश हो गए।

मछुवारो ने सोचा, अभी हमारे पास इतना साधान नहीं है कि हम इस तालाब की मछली और कछुए को पकड़ सकते है। हम कल सभी साधन के साथ आना चाहिए। इसके बाद वह मछुवारे वह से चले गए। इस मछुवारे की बात को एक कछुए ने सुन लिया।

वह कछुआ इस बात को अन्य दोनों कछुए को बताया। तीनो इसके बारे में काफी गभीर तरीके से सोचने लगे। वह सोच रहे थे कि वह किस प्रकार से अपनी और अपने परिवार की जान बचाएगे।

कुछ समय सोचने के बाद उन्होंने सोचा कि हमें इस तालाब को छोड़ देना चाहिए। इस विचार को तीनो कछुए ने पूरा समर्थन दिया। अब बारी थी उस तालाब को छोड़ने की। कुछ समय में ही एक कछुवा अपना पूरा परिवार लेकर दूसरे तालाब की ओर जाने लगा। उसे जाता देख। अन्य कछुए बोले, अभी रुको तो सही। हम कल भी या से जा सकते है और हमें इसके बारे में विचार करना चाहिए। इस पर आखरी कछुए ने कहा, भाई कल करे सो आज करे। कल किया होगा किसने देखा। यह कहते हुए वह कछुवा वह से चल दिया। शाम होते होते कछुवा एक बड़े तालाब में जा पंहुचा।

अगले दिन का सूरज भी निकला। फिर से मछुवारे उस तालाब के पास आए। मछुवारे को देखकर दोनों कछुवे डर गए। वह वहाँ से भागने लगे। लेकिन अभी तक बहुत देर हो गया था।

इस हिंदी स्टोरी से सीख- किसी भी काम को समय से पहले कर लेना चाहिए।

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इंसान से प्रेम करने वाला हंस- hindi story

इंसान से प्रेम करने वाला हंस- hindi story

गर्मी के मौसम में एक हंस एक पीपल के पेड़ पर बैठकर आराम कर रहा था। उस पीपल पर काफी ठंड था। कुछ समय बाद ही एक राहगीर उस पीपल के नीचे आराम करने के लिए बैठ गया। उस राहगीर को उस पीपल के निचे बैठने से बहुत आराम महसूस हो रहा था। थोड़ी ही देर में वह वहाँ सो गया। उस राहगीर के चेहरे पर सूरज की सीधी रोशनी पड़ रही थी। जिसके कारण उस राहगीर का नींद ख़राब हो सकता था।

इसको देखते हुए हंस ने अपना पंख इस प्रकार से फैलाया जिससे राहगीर के चेहरे पर सूरज की रोशनी न पड़े। राहगीर आराम से सो रहा था। अभी कुछ समय ही हुआ था तभी हंस का मित्र कौआ आ गया। हंस को इस प्रकार से पंख फ़ैलाने का कारण कौआ ने पूछा। इस पर हंस ने सब कुछ धीमी आवाज में बताया।

कौआ ने कहा, हे हंस भाई! तुम इंसान की मदद कर रहे हो। यह इंसान हम जैसे न बोल पाने वालो जानवरों को अपनी लालच के कारण मर देते है। हंस ने कहा, जो कुछ भी हो हमें अपनी ओर से किसी की मदद करना चाहिए। कौआ ने पिपला के पेड़ से कुछ पत्ते को तोडा। उसके बाद राहगीर के चेहरे पर फेक दिया।

पत्ते के गिरने के कारण राहगीर का नींद ख़राब हो गया। राहगीर ने जैसे ही अपना आँख खोला तैसे ही उसे हंस नजर आया। राहगीर को लगा कि यह खुरापाती हंस ने किया है। राहगीर ने तुरंत अपना धनुष निकला और हंस की ओर चला दिया। तीर हंस के छाती पर जा लगा। हंस के मुँह से आखरी चीख निकला और वह जमीन पर आ गिरा।

इस हिंदी स्टोरी से सीख- करे कोई और भरे कोई और।

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हिंदी स्टोरी (hindi story) या फिर हिंदी कहानी (hindi kahani ) को पढ़ना हर कोई पसंद करता है। हर एक व्यक्ति अपने बचपन के दिनों में और पढ़ाई के समय हिंदी स्टोरी (hindi story) और हिंदी कहानी को पढ़ता है। हमें हिंदी कहानी पढ़ना पसंद है।

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इसका सीधा कारण है हिंदी कहानी और हिंदी स्टोरी (hindi story) में हमें ऐसी कहानी को पढ़ने को मिलता है जो काल्पनिक है। कहानी से सही सीख मिलती है लेकिन कहानी के पात्र काल्पनिक होते है जिसके बारे में हम सोच भी नहीं सकते है। जैसे किसी जानवर का इंसान से बात करना।

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