भूत प्रेत और आत्मा की कहानी हिंदी में | bhoot pret aur aatma ki kahani

bhoot pret aur aatma ki kahani. भूत प्रेत और आत्मा की कहानी सुनते है हम समहम जाते है। हमें बुरी आत्मा से डर लगने लगता है। इसके बाद रात के समय भूत प्रेत और आत्मा (bhoot pret aatma) डराती है। चलिए हम भूत प्रेत और आत्मा की कहानी को पढ़ते है। वह भी हिंदी में।

आत्मा को बुलाना भारी पड़ा

aatma ki kahani
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‌आज से 10 साल पहले की बात है। आज मैं आपको अपने चचेरे भाई का डरावना अनुभव बताने जा रहा हूं । उसका नाम रितेश शर्मा है। और यह घटना तब की है । जब वह कॉलेज में पीएचडी की पढ़ाई कर रहे थे.

उस समय वह हॉस्टल में रहते थे. और परीक्षा से पहले उसके कुछ दोस्तों ने लाइब्रेरी में पढ़ाई करने के लिए गए. पढ़ाई करते हुए रात के 1:00 बज चुके थे । उस समय लाइब्रेरी में केवल तीन ही लड़के थे। लाइब्रेरी में सन्नाटा छाया हुआ था. और सारा होस्टल शांत था.

तभी उनमें से एक लड़के ने कहा कि बस यार पढ़ पढ़ कर बोर हो गए क्यों ना कोई खेल खेला जाए. जिससे जिससे दिमाग फ्रेश हो जाए . और नींद भी नहीं आएगी उनमें से एक लड़के का नाम दुर्गेश था। उसने बोला कि चलो हम सब किसी आत्मा से बात करते हैं । यह कहकर वह अपने कमरे में गया । वही वह एक बोर्ड बोर्ड लेकर आया आया ।

जिस पर ए टू जेड जेड लिखा हुआ था. 0 से 9 तक तक नंबर था .और किनारों पर यस या नो लिखा हुआ था बोर्ड के चारों तरफ उसने मोमबत्ती जलाई . सारी लाइटें बंद कर दी उसने सिक्का बोर्ड के बीच में रख दिया। उनमें से एक लड़का डर के मारे अपने कमरे में चला गया .

और वहाँ दो लड़के उस पासे पर एक एक उंगली रख दी उंगली रख दी एक उंगली रख दी उंगली रख दी फिर दुर्गेश ने कहा कोई डरना मत. यहां से भागना मत. वरना आत्मा परेशान करेगी ।

दुर्गेश बोलने लगा यहां पर कोई आत्मा अगर रहती हो तो बाहर आकर हमसे बात करो । वहां पर अजीब सा सन्नाटा और अंधेरा छाया हुआ था । अचानक वहां पर जोर जोर से आवाज से आवाज आने लगी उसने सोचा शायद कोई किताब गिर गई होगी । उसी समय सिक्का भी हिल रहा था । उसी समय रितेश को लगा वहां पर कोई आत्मा है ।

वहां पर बंद पंखा जोर-जोर से चलने लगा । लेकिन दुर्गेश ने कहा यहां से भागना मत वरना तुम सब परेशान हो जाओगे । आत्मा उसे नुकसान पहुंचाएगी । उसके बाद दुर्गेश ने कहा अगर आप मेरे सामने खड़े हो तो मेरे प्रश्नों का जवाब दो मोमबत्ती बुझ गए और दुर्गेश डर के मारे भाग गया।

लेकिन वहां पर रितेश फस गया और दरवाजा बंद हो गया । उसको लगा कि उसे कोई पीछे की तरफ खींच रहा है । और रितेश जोर जोर से चिल्लाने लगा बचाओ बचाओ उसकी आवाज सुनकर हॉस्टल के सभी लड़के उठकर लाइब्रेरी की तरफ दौड़े ।

सब लोगों ने मिलकर दरवाजे को धक्का दिया और दरवाजा खुल गया । रितेश शर्मा इस घटना के बाद आज भी लाइब्रेरी में जाने से बहुत डरते है । आज भी वह भूत प्रेत नाम से बहुत डरने है । यहां तक कि वह भूत की कहानी भी नहीं सुनते । हमें यह सीख मिलती है कि आत्माओं को मस्ती में कभी नही बुलाना नहीं चाहिए।

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अमावस का रहस्य aatma ki kahani

bhoot pret ki kahani
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अमावस की रात मन ज्यादा बेचैन और चिंतित रहता है. और नींद कम आती है। कमजोर दिल वाले लोगों के मन में आत्महत्या या हत्या करने का डर बढ़ जाता है। चांद का धरती के जल से से संबंध उत्पन्न होता है । अमावस आती है तो समुद्र में सैलाब आता है। क्योंकि चंद्रमा समुद्र के जल को ऊपर की ओर खींचता है । मानव शरीर में लगभग 70 प्रतिशत जल है ।

अमावस के दिन समुद्र की गति और लहरे बदल जाती हैं । विद्वानों के अनुसार इस दिन चंद्रमा का प्रभाव काफी तेज होता है। गांव के लोग कोई पंडित से तो कोई मौलवी से भूत प्रेत या फिर जिन्न को हटाने के लिए मंदिर या मस्जिद में जाते हैं । जो पंडित लोग बताते हैं . कि चार रास्ते पर दिया जलाओ या फिर नींबू काट दो तो तुम्हारे घर में सुख शांति आएगी. ऐसा करने से दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं.

और जीव जानवर भी इसका शिकार हो जाते हैं। एक समय की बात है हमारे बाबाजी गर्मियों के समय खड़ी दोपहर में बगिया जा रहे थे .और उन्हें कुछ लोग दिखाई दिए तो वे उन लोगों के पास जाकर बैठ गए और आराम करने लगे ( करीब 12:00 से 1:00 बजे का समय था) जब 3:00 बजे तो वे उठे.

और जोर-जोर से आवाज मारने लगे कि आप लोग कहां चले गए । इतने में एक बुढ़िया औरत दिखाई दी. और बोली कि यहां पे कोई दोपहर को आता ही नहीं क्योंकि यह बहुत घनी बगिया है. और दोपहर का समय था ।

आपको कोई सपना आया होगा । तब बाबाजी घबराए और हांफते हुए घर की तरफ दौड़े चले आए। और घर के अंदर आने के बाद उन्हें जोर का बुखार आ गया क्योंकि वह लोग कोई साधारण लोग नहीं थे। बल्कि भूत-प्रेत थे।इसलिए अमावस की रात को नहीं निकलना चाहिए।

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औरत और आत्मा की कहानी aatma ki kahani

aatma aur bhoot ki kahani
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‌एक बार मेरी बुआ और उनकी बहू दोनों भुजा बाजार गई थी। घर से बाजार काफी दूर था.सामान खरीदते- खरीदते समय कब निकल गया पता ही ना चला. और घर आते आते रात हो गई. बजार और घर के बीच में एक श्मशान पढ़ता था। जहां पर एक औरत दो दिन पहले ही जलाई गई थी। उसने आत्महत्या की थी।

मेरी बुआ और उनकी बहू दोनों बात करते-करते उसी रास्ते पर आ गई। तभी वहां बहू को लगा कि कोई उसे पीछे से कोई बुला रहा है। और वह मुड़ कर पीछे की ओर देखी और रुक गई। इतने में एक औरत सफेद साड़ी पहनकर और बाल खोलकर उसके पास आई और जोर-जोर से रोने लगी मुझे बचा लो मुझे बचा लो मुझे अपने साथ घर ले चलो।

मैंने बोला कि मैं घर पर जा ही रही हूं। आप भी मेरे साथ चलो और वह पीछे-पीछे थोड़ी दूर आने के बाद फिर से रोने लगी मैंने पूछा अब क्या हुआ। उसने बोला मैं तो आपके साथ वहां से चली आई और मेरा बेटा सो रहा था। वह वहीं पर छूट गया. तुम मेरे साथ चलो तो मैं उसे भी लेकर आऊँ. मैंने बोला तुम रो रही हो तो मैं तुम्हारे साथ चलती हूं.

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चलो बेटे को ले आओ मेरी बुआ थोड़ा आगे निकल आई उसने पीछे मुड़कर देखा तो मैं काफी दूर थी.और बात करते-करते पीछे जा रही थी. तभी मेरी मां गायत्री मंत्र पढ़ते हुए जोर-जोर से आवाज देने लगी बहु रुक जाओ आगे खतरा है।

उत्तेजित होकर बहु बोली कि मैं अपनी सहेली के साथ उसके बेटे को लेने जा रही हूं. तब तो बुआ के होश उड़ गए. और वो बोली कि( महामृत्युंजय का जाप करती हुई) बहु मेरे साथ घर चलो बहु ने बोला आज में बहुत खुश हूं क्योंकि मेरे साथ मेरी सहेली और उसका बच्चा भी है।

बुआ ने देखा तो उसे कुछ ना दिखा।अपने घर की तरफ दौड़ी और घर पे जाकर सबको बुलाकर ले आई । और बहु को बोला बहु घर चलो बहु की आंखें लाल-लाल और जुबान पर मानो आग जल रही जल रही है।क्योंकि उनके अंदर आत्मा घुस चुकी थी । जो बाद में पुजारीजी को दिखाने के बाद लड्डू पेड़ा चढ़ाने के बाद और नींबू काटने के बाद किसी तरह घर से चली गई।

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पुरानी हवेली का सच bhoot pret ki kahani

Truth of old mansion- bhoot pret ki kahani
Truth of old mansion- bhoot pret ki kahani

हमारे गांव के पास में एक पुरानी हवेली थी। इस हवेली की घटना बहुत ही डरावने रूप में दर्शाई गई है। यहाँ पे बड़ी-बड़ी पिक्चरों की शूटिंग होती थी। 3 से 4 साल पहले की बात है। यहां पर भोजपुरी पिक्चर के सभी कलाकार रुके हुए थे। वह रात बहुत ही डरावनी और खौफनाक थ।

सभी कलाकार में से एक अलग दोस्तों का ग्रुप था। जिसमें राम,राजू और मुकेश थे। एक बार मुकेश किसी काम से एक महीने के लिए शहर गया हुआ था। बाकी दोनों मित्रों ने उसे कहा कि जल्द ही वापस आ जाना ।

एक महीने के बाद जब मुकेश फिर से हवेली में रहने लगा तब वह अपने मित्रों से कम बात करता था। यहां तक कि वह उनसे मिलता भी नहीं था। और वो अपने काम को करने में बहुत कम रुचि रखता था । जब भी उसके मित्र उससे बात करने की कोशिश करते थे.तो वह उनकी बात टाल देता था। वह दिन भर पता नहीं कहां जाता था.

और रात के 12:00 बजे सोने के लिए ही हवेली में आता था। उसे अपने घर से हवेली में आए हुए केवल 6 ही दिन हुए थे. कि एक दिन उसका भाई उस हवेली में आ पहुँचा। मुकेश के मित्र ने मुकेश के भाई से कहा कि उसे क्या हुआ। वह केवल रात को सोने ही आता है। मुकेश के मित्र की बात सुनकर मुकेश का भाई रो पड़ा.

और बोला भला रात को कैसे आ सकता है। मैं तो उसका सामान ले जाने आया हूँ। हवेली से जाने के बाद मुकेश रास्ते में ही मोटरसाइकिल चलाते हुए कुचल गया था। क्योंकि उसकी मोटरसाइकिल की रफ्तार बहुत तेज थी इसलिए वह ट्रक के नीचे आ गया।

तभी मुकेश के मित्र सोच में पड़ गए कि वो कौन था। जो रात को सोने आता था। क्या वह उसका भूत था ? उस दिन के बाद मुकेश का भूत फिर कभी नहीं आया. पर सारे कलाकार डर के मारे रात को सो नहीं पाते थे। मुकेश के कमरे में ताला भी लगा दिया था। कहते हैं कि मुकेश को अपने मित्रों से लगाव था। फिर कभी भी कोई पिक्चर की शूटिंग इस हवेली में नहीं होती। सभी को यह घटना आज भी याद आती है।

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हम ऐसे ही भूत प्रेत आत्मा (bhoot pret aatma) की कहानी लिखते है जो सभी डरा सकते है। इस कहानी को पढ़ें के बाद आपको दर भी लगने लग सकता है। bhoot pret aatma की कहानी पढ़ने का ज्यादा मजा रात को ही आता है। ऐसे pret की कहानी पढ़ने के बाद लगता है कोई pret आसपास है

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