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बेस्ट ज्ञान की कहानी और ज्ञान की स्टोरी हिंदी में सीख के साथ gyan ki kahani

ज्ञान लेने का बहुत स्रोत होता है। इस सभी स्रोत में से एक सब अच्छा स्रोत होता है ज्ञान की कहानी। ज्ञान की कहानी (gyan ki kahani) एक ऐसा स्रोत है जिसकी मदद में हम काफी आसानी के साथ अपने ज्ञान को बढ़ा सकते है।

यहाँ पर हमने आपके लिए ज्ञान की कहानी लिखी है। इस ज्ञान की कहानी (gyan ki kahani) को पढ़ने पर आपका ज्ञान भी बढ़ा सकती है। इसके साथ ही आपके सोचने का तरीका भी बदलेगा।

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नक़ल करने का अंजाम- gyan ki kahani

नक़ल करने का अंजाम- gyan ki kahani

एक बार की बात है। किसी गाँव में बहुत ही गरीब किसान रहता था। वह किसान एक समय अमीर व्यक्ति भी रह चूका था। वह जब अमीर था तब भी और आज गरीब होने के बाद भी वह दूसरों की मदद किया करता था। वह जितना हो सकता था वह दूसरे की मदद करता था।

वह किसान जब भी मंदिर जाया करता तो ईश्वर से धन मांगता ताकि वह दूसरे की मदद कर सके। ऐसे ही कुछ समय बिता, एक दिन किसान ने एक सपना देखा कि अगले दिन तुम्हारे घर पर एक साधु आएगे।

जब वह तुम्हारे घर आए तो उनके घर के अंदर आते ही उनके सर के पीछे डंडे से स्पर्श करना। डंडे से स्पर्श करते ही वह पुरे तरह से सोने के बन जाएगे।

इस तरह तुम फिर से एक अमीर आदमी बन कर दूसरों की मदद कर सकते हो। अगले दिन ऐसा ही हुआ। उस किसान के घर पर एक साधु ने दस्तक दिया। यह किसान पहले से ही डंडा लेकर तैयार था।

जैसे ही वह साधु घर के अंदर आया किसान से डंडे से उसके सर के पीछे स्पर्श किया और वह पूरी तरह सुने के बन गए।

अब यह सब कुछ एक नाई (बाल काटने वाला) ने देखा लिया। यह नाई किसान के घर किसान का बाल काटने आया था।

उस नाई ने सोचा, अगर किसी साधु को डंडा से मारने पर सोने का बदलता है तो मैं इस तरीके से बहुत ही अमीर बन सकता हूँ। मुझे भी साधुओ को डंडे से मारकर अमीर बना चाहिए।

उस किसान ने तो बस एक ही साधु को डंडा से मारा मैं एक से ज्यादा साधु को डंडे से मारकर उससे भी ज्यादा पैसे वाला बन जाऊगा।

यह सोच कर नाई ने कुछ साधु को अपने घर भोजन और दान देने के लिए बुलाया। साधु भी परेशान थे कि जो नाई हमे कभी कुछ भी दान नहीं दिया आज वह भोजन भी खिलाएगा और दान भी देगा। वैसे भी वह सभी साधु नाई के बताये समय पर नाई के घर पहुँच गए।

नाई ने अपनी सारी तैयारी कर लिया था। जैसे ही साधु नाई के घर की अंदर गए। नाई ने अपने घर का दरवाजा बंद कर दिए। उसके बाद नाई साधुओं को डंडे से मारने लगा। लेकिन कोई भी साधु सोने का न बना।

साधु नाई को इस तरह से मारने का कारण समझ नहीं पा रहे थे। कुछ समय मार खाने के बाद सभी साधुओं को गुस्सा आ गया। सभी साधु मिलकर नाई को खूब मारा। नाई को मारने के बाद वह नाई के घर से बहार आ गए।

कहानी से ज्ञान: हमें किसी का नक़ल कभी नहीं करना चाहिए।

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एकता में बल होता है- ज्ञान की कहानी

एकता में बल होता है- ज्ञान की कहानी

बहुत समय पहले की बात है। कही दूर एक जंगल हुआ करता था। उस जंगल में एक पीपल का पेड़ था। वह पीपल का पेड़ बहुत साल पुराना था। उस पीपल के पेड़ को देखकर लगता था कि उसकी उम्र करीब 100 साल हो गई। जब भी कोई राहगीर उस जंगल से जाया करता था तो उस पीपल के नीच रुक कर आराम किया करता था।

उस पीपल के नीचे काफी ठण्ड रहा करता था, यह गर्मी के मौसम में राहगीर को खुद की और घीच लिया करता था। उस पीपल के पेड़ पर कई चिड़िया अपने घोसले में रहा करती थी। एक दिन एक कौआ ने देखा कि कोई शिकारी उस पीपल के पेड़ के पास आ रहा है।

कौआ जल्द से पीपल के पेड़ के पास आया और सभी को शिकारी के बारे में बता दिया। कौआ ने कहा, देखो यह किस तरह से हमें अपने जाल में फ़साने के लिए दाना डाल रहा है। पर हमें उस दाने की और देखना भी नहीं है।

कौआ की जानकारी देने के बाद उस पीपल का कोई पंछी भी उस दाने को खाने नहीं गया। दोपहर का समय था आकाश में उड़ रहे कुछ कबूतर का झुंड ने जमीन पर पड़े दाने को देखा। भूख एक ऐसी चीज है जो मौत की कुए में भी डाल देती है।

कबूतरों को दाना तो दिख रहा था लेकिन शिकारी का जान नहीं दिख रहा था। सारे कबूतर जाल में फस गए। सभी कबूतर रोने लगे। कबूतर का राजा बोला, अब रोने से कुछ नहीं होने वाला है हमें एक साथ उड़ाना चाहिए। हम एक साथ उड़ कर इस जाल को ले उड़ सकते है।

राजा की बात मान कर सारे कबूतर एक साथ उड़े। एक साथ उड़ने के कारण वह कबूतर जाल को लेकर आकाश में उड़ गए।

शिकारी का शिकार और उसका जाल भी देखते ही देखते गायब हो गया। इधर आकाश में उड़ने के बाद राजा ने कहा, हम सभी को दक्षिण की ओर चलना चाहिए। दक्षिण की ओर एक चूहा रहता है जो मेरा मित्र है।

शायद वह हमारी मदद कर सकता है। राजा की बात मनकर सारे कबूतर दक्षिण की ओर चल दिए। चूहे के घर पहुंचने पर कबूतरों के राजा ने चूहे को बुलाया और कहा, प्यारे मित्र आज हमें तुम्हारी मदद की जरूरत है। तुम इस जाल को काट कर हमें आजाद कर दो।

चूहे ने कहा, ठीक है! लेकिन यह सब कैसे हुआ? कबूतरों के राजा ने कहा, भूख की आग ने हमारी आँख पर पर्दा डाल देता है। हमें भोजन तो दिखता है, लेकिन उस भोजन को देना वाला नहीं दिखता है। वह कैसा है? यह नहीं दिखता है।

चूहे ने कहा ठीक कह रहे हो। चूहा जाल को काटना शुरू कर दिया। कुछ समय के अंदर ही चूहे ने सभी कबूतर को जाल से आजाद कर दिया। कबूतरों के राजा ने कहा, मैं तुम्हे किस मुँह से धन्यवाद कहु। इस पर चूहे ने कहा, एक मित्र दूसरे मित्र के काम न आये तो वह मित्र ही क्या और उनमे मित्रता ही किया।

इस कहानी से हमें ज्ञान मिलता है कि हमें किसी भी काम को एक साथ करना चाहिए। एक साथ मिलकर किसी काम को किया जा सकता है। इसलिए एक साथ मिल कर कोई भी काम करे।

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कर्म ही जीवन को तय करता है- ज्ञान की कहानी

कर्म ही जीवन को तय करता है- ज्ञान की कहानी

एक बार की बात है। कही दूर एक गौत नामक एक संत रहा करते थे। इसका एक ही बेटा था। उस बेटे को वह बहुत प्यार किया करते थे। जितना वह अपने बेटे से प्यार करते थे उतना ही उनका बेटा उनसे प्यार किया करता था। उस संत के बेटे का नाम अर्जुन था।

एक दिन की बात है। वह शांत भगवान की पूजा कर रहे थे तभी उन्हें पता चला कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। यह सुनकर संत के चेहरे पर हल्की सी उदासी दिखी फिर से वह सामान्य हो गए।

लकड़े का शव आया। तभी संत के पास एक शिकारी आया। शिकारी कहने लगा, महाराज! आपके बेटे की मृत्यु का कारण यह सांप है। इस सांप ने ही आपके बेटे को काट कर मौत के घाट उतार दिया। अब आप ही बताए कि मैं इस साँप के साथ किया करू। क्या मैं इस साँप को टुकड़ो में काट कर मार दू, या फिर गर्म तेल में डाल कर मार दू।

संत महराज ने कहा, आप इसके साथ कुछ भी न करें। हमारा धर्म यह नहीं कहता है कि किसी को मारा जाए। अब इसको मार देने के बाद भी मेरा बेटा जीवित नहीं हो सकता हैं। तो फिर इसे क्यों मारा जाए। इसको जो अच्छा लगा उसने वह किया। संत और शिकारी की बात को सुनकर साँप भी इंसान की भाषा में बोल उठा।

साँप ने कहा, महराज! आपके बेटे के मौत का कारण मैं नहीं हु। बल्कि मृत्यु के देवता ने ही मुझे बढ़ावा दिया की मैं आपके बेटे को डस लू और मैंने आपके बेटे को डस लिया।

अभी इसकी बात हो ही रही थी। तभी मृत्यु देवता भी वहा आ गया। मृत्यु देवता ने कहा, किसी के मौत का कारण मैं नहीं होता हूँ। आपके बेटे के मौत का कारण भी मैं नहीं हूँ।

मुझे तो काल ने आदेश दिया कि आपके बेटे की जान लिया जाए। इसलिए ही मैं सांप को डसने के लिए बढ़ावा दिया। इसमें न तो साँप दोषी है और न ही मैं। काल के अनुसार ही यह धरती चलती है। काल जो चाहता है वह ही होता है। हम सब काल के अनुसार काम करते है।

मृत्यु के देवता संत, शिकारी, और साँप को बता रहे थे। अभी तक यह खुद को सही बता ही रहे थे तभी वह पर काल भी आ गया। काल ने कहा, मैं भी किसी काम के लिए जिम्मेदार नहीं हूँ । जो कुछ भी किसी की साथ होता है उसके लिए उसका कर्म ही जिम्मेदार होता है।

इस लड़के के मौत का कारण इसका पिछले जन्म के कर्म जिम्मेदार है। जो भी जैसा कर्म करता है। उसका वैसा ही जन्म और मृत्यु मिलता है।

इस कहानी से हमें ज्ञान मिलता है कि हमें हमेशा अच्छा कर्म करना चाहिए। कर्म ही हमारे सामने फल के रूप मिलता है। अगर किसी काम को करके हम किसी को दुःख देते है तो कोई ऐसा भी होगा, जो कुछ ऐसा काम करेगा जिससे हमें दुख होगा।

वही अगर हम कोई काम करके किसी को खुश करते है तो कोई ऐसा भी होगा जो कुछ ऐसा काम करेगा जिससे हमें ख़ुशी मिलेगा।

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हमने ऐसी ज्ञान की कहानी (gyan ki kahani)लिखी है जो बच्चे और बड़ो दोनों के ज्ञान को बढ़ा सकती है। कहानी को पढ़ना किसको पसंद नहीं होता है। छोटा बच्चा भी कहानी पढ़ना पसंद करता है। वैसे भी अगर कहानी हिंदी में हो तो कहानी पढ़ने में और मजा आता है।

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हमने ज्ञान की कहानी हिंदी लिखी है। जिससे ज्ञान की कहानी (gyan ki kahani) पढ़ने में मजा भी आए और ज्ञान भी मिले।

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