hindi stories and story in hindi with moral for kids

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list of hindi stories

  1. सबसे बड़ी मुर्खता
  2. बुद्धिमान सियार
  3. मंत्री का चुनाव
  4. बेवक़ूफ़ कौवा

सबसे बड़ी मुर्खता hindi story

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किसी बरगद के पेड़ पर एक साथ चार पक्षी रहते थे – कबूतर, कौआ बगुला और तोता रहता था चारो में दोस्ती थी सभी कार्य वे मिलजुल कर लिया करते थे. उनके दिन अच्छी तरह से गुजरते थे .

मगर जब कभी उनके किसी कार्य में कोई गड़बड़ी होती तो उसका सारा दोस कबूतर सीधा, सच्चा और सरल स्वभाव का था गलती नहीं रहेने पर भी वह उसे स्वीकार कर लेता, ताकि उनकी दोस्ती में कोई गड़बड़-झाला न हो जाए.

एक दिन भोजन बन रहा था. बगुला ने दाल में नमक कम डाला. जब पता चला की दाल में नमक कम है तो बगुला ने तुरंत सफाई दी, ”में क्या करता, कबूतर नमक समय पर लाया ही नहीं,जो थोड़ा सा था, वाही मैंने दाल में डाल दिया.”

बगुले की बात पर कबूतर ने कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की चुप रहा. नमक तो आ ही गया था. अलग  पैकेट में बंद पड़ा था. बगुला नये पैकेट को खोलकर दाल में नमक नहीं डाला.

कबूतर ने यह नहीं दिया. सोचा बगुला बुरा मान जायेगा. दोस्ती टूट सकती है चुप रहना ही ठीक समझा एक बार कोआ की असावधानी से तेल का पीपा लुढ़क गया. झट उसने कबूतर को झिड़क दिया, तुम किस जगह  तेल का खुला पीपा रखते हो ?

सारा तेल गिरकर बह गया. कबूतर कह सकता था पीपा तो ठीक ही जगह रखा था. देखकर कोई कम करना चाहिए. जल्दी का काम शैतान का होता है मगर उसने ऐसा नही कहा चुप्पी साध ली. बात बनाने पर कोआ दुखी हो जाता. मेल नही रखता

ऐसे ही दिन तोता बाजार से कोई फल खरीद कर लाया. फल सडा निकला. तोते ने इसका दोष कबूतर के सिर यो मढ़ा, पैसे ही कबूतर ने मुझे देर से दिए. बाजार पहुचते –पहुचते अँधेरा घिर आया था. फल वाले ने अँधेरे का लाभ उठाकर् मुझे सड़े फल दे दिए.

बात ऐसी नही थी कबूतर ने तोते को बहुत पहले पैसे दिए थे. तोता ही देर से बाजार के लिए निकला था. तोता जानता था, वह जो कुछ कहेगा ,

कबूतर कभी उसकी बात का विरोध  नही करेगा. सहज स्वीकार लेगा. अतएव उसने अपनी गल्तीं बेझिझक कबूतर के सिर मढ़ दिया. चुपचाप रहकर कबूतर ने उसे स्वीकार भी कर लिया ताकि आपसी प्रेम बना रहे. दोस्ती निभाते चले.

इस तरह सबकुछ ठीक चल रहा था. वर्षो मजे से गुजरे.

कुछ दिनों के बाद कोई जरुरी काम  से कबूतर दो सप्ताह के लिए बाहर चला गया. जब वह लोट कर आया तो उसने पेड़ पर किसी को नहीं  देखा. वह बहुत चिंतित हुआ. उसने तीनो की खोज खबर लेनी शुरू कर दी. बगुले से भेट हुई तो पता चला की आपसी मतभेद की वजह से तीनो लड़-झगड़ कर एक- दुसरे से अलग हो गये. दोस्ती टूट गयी.

कबूतर ने फिर सबको एक जगह एकत्र किया और कहा , हम लोगो में एक ही बुराई है जिसकी वजह से हमारी दोस्ती टूटी.

क्या बुराई है ? सबने एक साथ पूछा.

हम अपनी गल्तियो को स्वीकार करना नही चाहते. दुसरे पर मढ़ने की कोशिश करते है. यह अच्छी  आदत नही है. अब दोस्ती टूटने से आज हम सब की परेशानी ज्यादा बढ़ गयी है, पहले से ज्यादा दुखी है. याद रहे,  मिलकर रहने में जो सुख है, आनन्द है: वह एकाकीपन में कभी नही हो सकते बिलकुल सही कहा  ? सबने स्वीकारा.

हम चाहते तो फिर मिलकर एक साथ रह सकते है. सुख और आनंद जीवन जी सकते है. मगर एक शर्त है. हम में से जिस किसी से जब भी कोई गलति हो, उसे दुसरे पर कभी नाह मधे अपनी गलती सहज स्वीकार कर ले.

इससे हम छोटे नही हो जायेगे बल्कि यह हमारा बडपन होगा. हमारी दोस्ती पर इसका अच्छा प्रभाव पड़ेगा. वह गहरी होती चली जाएगी. सभी का जीवन सुखमय – आनंदमय होगा. गलती तो जीवन में हर किसी से होती है. उसे स्वीकार कर ही हम उसमे सुधार ला सकते है –  है न ? कबूतर ने सवालिया निगाह तीनो पर डाली.  ”अवश्य” , तीनो की मिली -जुली आवाज आई.

”जानते हो , अपनी गलती नहीं स्वीकार करना अकलमंदी नहीं ,सबसे बड़ी मुर्खता है. इसी मुर्खता की वजह से हम एक -दुसरे से अलग होकर बिखर गए. हमारा सुख ,चैन और आनंद खो गए. हमारा जीवन नरकमय हो गया.” कबूतर ने अपनी बात पूरी की ”

अब हम ऐसी मुर्खता कभी नहीं करेगे. मिल कर रहेगे. ”समवेत स्वर उभरा.

moral of hindi story

इस कहानी से हमे ये म सिख मिलते है की हमे हर काम सोच सम्ज्ह्कर करना चाहिए . कभी भी मुर्खता भरा, काम नही करना चाहिए .

बुद्धिमान सियार की कहानी-

बुद्धिमान सियार की कहानी hindi stories
बुद्धिमान सियार की कहानी hindi stories

एक जंगल में एक सियार का परिवार रहता था, सियार अपनी पत्नी और बच्चों के साथ ख़ुशी से रहता था. लेकिन जिस गुफा में सियार का परिवार रहता था, वह बहुत पुराना हो गया था और उसके परिवार को नया घर चाहिए था.

सियार पुरे जंगल में घर की तलाश कर रहा था. खोजते खोजते उसे एक गुफा मिली, जो शेर की थी. शेर शिकार के लिए कही बाहर गया हुआ था, इसलिए शेर की गुफा खाली थी. सियार ने उसका फायदा उठाया, और अपने परिवार के साथ वहाँ रहने लगा.

थोड़े दिन बाद , शेर जब वापस आया तो उसने सुना की गुफा के अंदर से कुछ आवाजें आ रही थी. वो सोच में पड़ गया. की मुझसे ज्यदा ताकतवर और कौन है जो मेरी गुफा में आके रहने की हिम्मत किया.

शेर गुफा के थोड़े नजदीक गया, शेर को आते देख सियार डर गया, और सोचने लगा की मैं शेर से अपने परिवार को कैसे बचाऊँ. उसने एक तरकीब लगायी, वो अपनी के पास गया और बोला की जब मैं बाहर जाऊं तो तं बच्चे को किसी तरह रुलाना और मेरे पूछने पर बताना की बच्चा शेर का ताज़ा मांस खाने की जिद कर रहा है.

उसकी बीवी ने वैसा ही किया जैसे सियार ने समझया था, तरकीब काम आ गयी और शेर ये सब सुनके डर गया और वहाँ से भाग गया. रास्ते में शेर को हाथी मिला, शेर को डरा हुआ देख हाथी ने पूछा की क्या हुआ भाई तुम इतना डरे हुए क्यों हो. तो शेर ने बताया की मेरी गुफा में मुझसे भी बड़ा कोई और आ गया है.और वो मुझे खाने की बात कर रहा है.

यह सुनकर हाथी बोला की कोई बात नही चलो मैं तुम्हारे साथ चलकर देखता हूँ की कौन है वो, शेर हाथी पर विश्वास करके उसके साथ गुफा की ओर गया.

यह देख सियार डर गया और उसने फिर से एक तरकीब लगायी और फिर वो अपनी बीवी से कहने लगा की तुम परेशान मत हो बच्चे को चुप करवाओ, मैंने जिस हाथी से शेर को लाने को कहा था वो उसे लेकर आ रहा है.शेर ये सुनकर डर गया और हाथी का साथ छोड़कर वो वापस से जंगल में भागने लगा.

भागते भागते उसे रास्ते में बन्दर मिला, उसने भी शेर से वही सवाल किया और बोला की इस बार आप मुझपर भरोसा करके मेरे साथ गुफा की ओर चलिए. शेर चल पड़ा बन्दर पर भरोसा करके लेकिन इस बार उसने एक शर्त रखी उसने बन्दर से कहा की मैं तुम्हारे साथ चलने को तैयार हूँ लेकिन तम्हे मेरी और अपनी पूँछ एक साथ बंधनी होगी ताकि तुम मुझे अकेला छोड़कर ना भागो ,बन्दर ने शेर की बात मान ली और सियार के साथ चल पड़ा.

शेर को वापस आता देख सियार ने फिर से वही तरकीब अपनाई, और जोर जोर से अपनी बीवी से कहने लगा. बच्चे शांत करवा दो अब तो शेर कही भाग नही सकता मैंने बन्दर को उसे लाने को कहा था और बन्दर उसे अपनी पूंछ से बांधकर लाया है.

शेर इतना ही सुनकर बहुत रफ़्तार से जंगल की ओर भागा, शेर ने बन्दर को पूरे रास्ते में घसीटा. बन्दर की इसी दौरान मौत हो गयी शेर जब थोड़ी दूर पहुँच गया तो उसने पीछे बन्दर को देखा और वो ये नही समझ पाया की बन्दर मर चुका है वो बन्दर से कहता है तमने भी मुझे हाथी की ही तरह धोखा दिया. और शेर अपनी पूंछ बन्दर से छुड़ाकर वहाँ से चला जाता है.

सियार ने अपनी बुद्धिमानी से शेर को उसकी ही गुफा से बाहर कर दिया और बन्दर अपने बेवजह दूसरों के मामले में घुसने की आदत की वजह से मारा जाता है.

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मंत्री का चुनाव

नंदन वन का  राजा शेर सिंह बहुत ही समझादार और शांतिप्रिय राजा था. उसके राज्य में किसी भी जानवर को किसी से कोई कष्ट नही था. सब ओर खुशहाली ही खुशहाली थी. सभी अमन-चैन से अपनी जिंदगी गुजार रहे थे. नंदवन की प्रजा को अमन-चैन की जिंदगी जीते देखकर आस –पास के अन्य जंगल के राजा भी दातो तले उंगली दबा लेते .

राजा शेरसिंह की इतनी अच्छी शुव्यवस्था का कारण यह था कि नंदवन के राजकार्य के सभी काम के लिए अलग-अलग सुव्वस्थित विभाग बना रखे थे. हर विभाग का मुखिया एक मंत्री होता था खाद विभाग का रखवाला मंगुराम भालू था तो का मस्तराम मालू हाथी था.

नेया विभाग के मुखिया थे सियार ; तो सुरक्षा का जिम्मा हेट-कटे चांदमल चीते के ऊपर था . इन सभी लोगो के ऊपर एक प्रानमंत्री के रूप में अपना दाएयित निभाने में माहिर बबर सैरुमल थे “ जो अपनी सूझ-बूझ और दुर्सित द्वारा पुरे नंदनवन को सुवस्त्वस्ती रखेने में शेरसिंह को मंत्रंडा एव परामर्श देते रहते.

दुर्भाग्य से एक बार जंगल में कुछ शिकारी आ गए और प्रधानमंत्री बब्बर शेरुमल उनकी गोली का शिकारी हो गया. अकस्मात उनकी मृत्यु से राजा शेरसिंह बहुत चिंतित हो उठा. आखिर नंदन वन की सुरक्षा का प्रश्न था. आखिर किसे चुने इस प्रधानमंत्री पद  के लिए क्यूंकि इस प्रमुख पद पाने के लिए, सभी जी- जान से लगे हुए थे. कई दिन के सोच विचार के बाद राजा शेर सिंह ने यह निणर्य लिया की जो भी मंत्री मेरे प्रश्नों का सबसे उपयुक्त उत्तर देगा उसे ही वे प्रधानमंत्री का पद देंगे.

परीक्षा के दिन सभी लोगो को एक स्थान पर जमा होने का आदेश दिया गया. सभी मंत्री अपनी धाक  ज़माने के लिए बढचढ कर हिस्सा लेने पहुचे. राजा शेरसिंह ने कहा —- मंत्रिगढ़, यह तो आप जानते होगे की जो मेरे प्रश्नों का सबसे अधिक उपयुक्त उत्तर देगा उसे ही मंत्री का पद मिलेगा. यह कहकर राजा शेरसिंह ने प्रश्न पूछा —– मान लीजिये दरबार लगा हुआ है और कोई शिकारी मेरे पर निशाना साधे खड़ा है. मै उसे नही देख पाता पर तुम्हारी नजर उसपर पद जाए तो आप क्या करेंगे ?

प्रश्न सुनते ही खाद विभाग के मंगुराम भालू शान से अपना हाथ माथे पर फेरते हुए बोला—- महाराज उस पापी पर आपकी हत्या का आरोप लगाकर मुकदमा चलाऊंगा जिससे उसे उचित दंड दिया जा सके इसी तरह से सभी ने अपनी- अपनी बुद्धि का कोशल दिखाते हुए उत्तर अपने- अपने ढंग से दिए. अंत में सुरक्षा मंत्री चांदमल चीते ने अपना मत इस प्रकार रखा.

महाराज उस नीच पापी शिकारी को दंड मै दूंगा ही , पर सबसे पहले आपकी जान कि रक्षा करना आवश्यक होगा , इसलिए मै पूरी जल्दी से आपको आपके आसन से हटाने का पर्यतन करूँगा जिससे उसका निशाना चुक जाए और शीघ्रता से छलांग द्वारा उस पर हमला कर उसे पल भर में ही उसको मजा चखा दूंगा.”

राजा शेर सिंह बहुत प्रभावित  हुए और प्रसन हो, वाही पर तुरंत चांदमल चीते को प्रधामंत्री पद देने की घोषडा कर दी इस प्रकार सभी जानवरों ने भी राजा के इस निर्णय की भूरी- भूरी प्रशंसा की साथ ही चांदमल चीते को भी, जिसने अपनी बुद्धि द्वारा प्रधानमंत्री के पद को हासिल कर लिया.

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