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पेड़ की गवाही hindi kahani

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एक बार की बात है। एक गाव में दो दोस्त रहते थे। एक का नाम राम और दुसरे का नाम श्याम था। वह दोनों काफी अच्छे दोस्त थे।

वह दोनों पैसे कमाने परदेश गए। कुछ ही दिन में वह काफी ज्यादा पैसा कमा कर गाव आ गए।

फिर उन्होंने सोचा की अगर पैसा घर पैसा रखेगे तो चोरी हो सकता है। इस उन्होंने अपना पैसा एक पुराने बरगद के पेड़ के निचे गडा खोद कर छुपा दिया।

दोनों में यह बात तय हुआ की जब भी पैसा निकलेगे तो साथ साथ निकलेगे। फिर वह अपने अपने घर चले गए।

राम बहुत ही सीध,भोला व ईमानदार था। जबकि श्याम बहुत ही चालाक व बेइमान था।

वह कुछ दिन बाद ही उस पेड़ के पास जाकर सारा पैसा निकल लिया। फिर वह राम के पास गया और बोला, “भाई मुझे कुछ पैसो की जरूरत है। क्यों न हम उस दबाए हुए पैसो को निकल ले।“

फिर दोनों मित्र पेड़ के पास आए और गढ़ा खोदा तो देखा की पूरा पैसा गायब है।

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फिर वह दोनों एक दुसरे को चोर ठहराने लगे। उन दोनों में काफी झगडा बड गया फिर वह दोनों राजा के पास पहुचे और और पूरी बात बिस्तर से बता दिए।

राजा ने कहा, “तुम में से किसने पैसे का चोरी क्या है? यह तो वह पुराना बरगद का पेड़ ही बताएग। कल हम पेड़ की गवाही लेने के बाद फैसला देगे।“

ईमानदार राम ने सोचा की ठीक है पेड़ तो झूठ नही बोलेगा। इधर श्याम भी खुश हुआ।

अगले दिन राजा उन दोनों के साथ बरबाद के पेड़ के पास पंहुचा। यह देखने के लिए की पुराना बरगद कैसे गवाही देता है काफी लोग भी वह पहुचे थे।

राजा ने पेड़ से कहा , “पेड़ महाराज अब आप ही बताई की धन किसने चुराय है।“

तो पेड़ से आवाज “आई राम ने चोरी की है।“

यह सुनते ही राम रो पड़ा और कहने लगा “पेड़ बिल्कुल झूट बोल रहा है।

तभी राजा ने आदेश दिया अब तो पेड़ की गवाही सुन ली गई तो इस पेड़ को आग लगा दो। सैनिको ने पेड़ में आग लगा दिया। आग लगते ही पेड़ से आवाज आने लगी। हाय! मै जला मुझे बचोव। कोइ बचोव।

राजा ने सिपहिओ को आदेह दिया को पेड़ के अन्दर जो भी है उसे बाहर निकालो।

सिपाही ने एक बुजुर्ग को बाहर निकला जो की श्याम के पिता थे।

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अब राम श्याम और जानत सब कुछ समझ गई। राजा ने श्याम और उसके पिता को जिल में डाल दिया। और राम को सारा पैसा दे दिया। पर राम ने श्याम के पैसे उसके पत्नी व बच्चो को दे दिया।

कहानी की सीख– ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है।

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धोबी का गधा kahani in hindi

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the moral of this hindi kahani Whose work should be done.

एक बार की बात है। एक धोबी के पास के गधा और एक कुता था। वह हर रोज गधे के पिट पर कपडे लादकर और कुते को अपने साथ लेकर घाट पर पहुचता था।

धोबी कपड़ो को धो कर सुखाने के लिए दाल देता और कुता उस कपडे की देख रेख करता था।इधर गधा सारा दिन चाव में खड़े हो कर घास चरता रहता था। दिन ख़त्म होने पर धोबी घर वापस आ जाता था।

एक रात की बात है। उस धोबी के घर में कुछ चोर घुस आए। चोरो को आते कुते और गधे दोनों ने देखा। पर कुत्ता चोरो को देखकर भोंकने के वाजे सोने लगा।

इस पर गधे को बहुत ही गुस्सा आया। उसने कुत्ते से कहा, हरे! नमकहराम तुम अपना काम क्यों नही करता। मालिक के घर में चोर चले आए है पर तू सो रहा है। भोकता क्यों नही?”

इस पर कुत्ते ने कहा, मै सारा दिन तो काम करता ही हु। रात को भी करू। मै नही भोकुगा।“

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“अब जाने दे वह हमारे मालिक है तू उनके लिए न सही तो मेरे लिए ही भोक दे।“ गधे ने कहा।

इस पर कुत्ते ने कहा, “तो तू ही क्यों नही रेगता। अब मुझे सोने दे।“

इस पर गधे ने कहा, “तू तो कुत्ते के नाम पर कलंक है। अब देख मै कैसे मालिक को जगाता हु।“ यह कहने के बाद गधा ढेंचू- ढेंचू करने लगा।

कुत्ता आराम से सोने लाग। धोबी अन्दर गहरी नीद में सो रह था। धोबी ने जब ढेंचू- ढेंचू की आवाज सुना तो उसकी नीद खुल गई।

उसके नीद खुलते ही उसे बहुत गुस्सा आया की कुत्ता आराम से सो रहा है और यह गधा नीद ख़राब कर रहा है।

उसने अपने चारपाई के पास रखा लाठी उठाया और गधे को अनगिनत लाठी मरने लगा। गधा अपनी बात कहने क कोसी कर रहा था। पर धोबी को कुछ भी समझ नही आ रहा था।

जब गधा चारो खाने चित हो गया। तो धोबी भी अन्दर जा कर सो गया। यह सब होने के बाद कुत्ता गधे के पास आया और बोला, “कुछ समझ आया, जिसका जो काम उसी को साजे, दूजा करे तो डंडा बाजे।“

कहानी की सीख– जिसका जो काम हो, उसे वही करना चाहिए। व दुसरे के काम में टाग नही आड़ाना नहीं चाहिए ।

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