Kahani in hindi collection baccho ke liye hindi kahani gyan se bhari hue kahani

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Kahani देखने का नजरिया

This kahani or story is based on a person can see a same problem in two way positive or negative

एक बार एक सूफी संत अपने एक शिष्य के साथ एक गांव में पहुंचे। तभी उनका अनुयाई उनके पास पहुंचा और बोला, “हे भगवन्, इस शहर में तो अति मूर्ख लोगो की भरमार है। इतने बुद्धिहीन कि कोई कुछ सीखना ही नहीं नहीं चाहता। किसी में भी ज्ञान हासिल करने की इच्छा नहीं है। यहां आप किसी का भी हृदय परिवर्तन नहीं कर पाएँगे।”

संत ने इस व्यक्ति से कहा, “तुम सही कह रहे हो।”

थोड़ी ही देर बाद संत का एक और अनुयायी वहां पहुंचा और खुशी से कहने लगा, “प्रभु, आप यहां पधारे, यह तो इस गांव का सौभाग्य है। लोग तो आपसे शिक्षा ग्रहण करने के लिए कब से प्रतीक्षा कर रहे हैं।”

संत ने इस व्यक्ति को वही जवाब दिया, “तुम सही कह रहे हो।”

संत के साथ आए शिष्य ने उनसे पूछा, “आपने पहलेवाले व्यक्ति को भी सही बताया और जो उसके उलट बात कर रहा है, उसे भी आप सही कह रहे हैं। आखिर दोनों सही कैसे हो सकते हैं?”

अपने शिष्य की जिज्ञासा शांत करते हुए संत ने कहा, “हर व्यक्ति दुनिया को उसी तरह से देखता है जैसा वह उससे होने की उम्मीद रखता है। इसलिए मैंने दोनों की ही बात का विरोध नहीं किया। एक को दुनिया अच्छी दिखती है और दूसरे को बुरी नजर आती है। क्या दुनिया में एक ही समय पर एक ही जगह अच्छे और बुरे, दोनों तरह के लोग नहीं होते? दोनों में किसी ने भी गलत नहीं कहा, सिर्फ अधूरी बात कही।”

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Kahani माँ की ममता

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अपने पिता की मृत्यु के बाद लड़के ने अपनी मां को वृद्धाआश्रम में रख दिया। इस आश्रम के कमरों में पंखे नहीं थे। कोई साल इस आश्रम में गुजारने के बाद एक दिन बृद्धा बीमार हो गई। डॉक्टर ने उसके बेटे को बुलाया।

बेटे ने मां से पूछा, “आपको अगर कुछ चाहिए तो बताओ।”

इस पर मां ने कहा कि इस आश्रम के कमरों में पंखे लगवा दो। लड़का काफी पैसेवाला था और उसका बड़ा व्यापार था। इसलिए उसके लिए यह कोई बड़ी बात नहीं थी। उसने मां से कहा, “आपको इतने साल यह यहां रहते हुए हो गए, लेकिन आपने मुझे पहले क्यों नहीं बताया।

और अब जब आपके पास समय ज्यादा नहीं बचा है, तो पंखे की क्या जरूरत है?” इस पर वृद्ध ने कहा, “बेटा, मैं तो बिना पंखे के रह सकती हूं, लेकिन मुझे चिंता तुम्हारी है। तुम यहां बिना पंखे के नहीं रह पोओगे।”

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Kahani पेड़ और राजा

एक लड़का आम के पेड़ पर पत्थर मार रहा था। उसी वक्त एक राजा वहां से गुजर रहा था । तभी गलती से एक पत्थर राजा को जा लगा। राजा के सैनिकों ने दौड़कर उस लडके को पकड़ लिया। इसके बाद लडके को दरबार में पेश किया गया।

राजा ने कहा, “इस जुर्म के लिए तुम्हें सजा दी जाएगी। किसी को भी राजा पर पत्थर फेंकने का साहस नहीं करना चाहिए, वरना कानून का राज कायम करना मुश्किल हो जाएगा।”

राजा की बात सुनकर लड़के ने कहा, “जब मैं पेड़ पर पत्थर मारता हूं तो पेड़ मुझे मीठा रसदार फल देता है। और जब यही पत्थर राजा को लग जाता है तो वह दंड देता है। हे राजन ! तुमसे भला तो वृक्ष है।”

लड़के की बात सुनकर राजा को अपने सुनाए फैसले पर शर्मिंदगी हुई और उसने लड़के को छोड़ दिया।

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Kahani शेर और डॉल्फिन की दोस्ती

Kahani शेर और डॉल्फिन की दोस्ती
Kahani शेर और डॉल्फिन की दोस्ती

This kahani or story motive is friendship

एक बार समुद्र किनारे घूमते हुए शेर को डॉल्फिन दिखाई पड़ गई। शेर ने उससे कहा कि क्यों ना हम दोस्त बन जाएं। मैं तो जमीन के सारे जानवरों का राजा हूं और समुंद्र में तुम से बड़ा कोई नहीं है, इसलिए तुम सब पर राज करती हो। इसलिए हमें दोस्त बन जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर एक दूसरे की मदद करनी चाहिए। शेर के इस प्रस्ताव पर डॉल्फिन राजी हो गई और दोनों दोस्त बन गए।

कोई ज्यादा वक्त नहीं गुजरा था। थोड़ी ही देर बाद शेर एक जंगली सांड से उलझ बैठा। सांड ने उसकी नाक में दम कर दिया। शेर ने मदद के लिए डॉल्फिन को पुकारा। उसने देखा कि उसके पुकारने पर भी डॉल्फिन पानी से बाहर नहीं आई तो शेर ने उसे विश्वासघाती कह डाला।

जवाब में डॉल्फिन ने कहा, “मुझे दोष मत दो। इसके लिए तो मेरे प्रकृति दोषी है। समुंद्र में चाहे कितनी ही ताकतवर हूं, लेकिन जमीन पर मदद के लिए मामले में प्रकृति ने मुझे असहाय बना दिया है।”

इसीलिए कहा गया है कि उन लोगों को चुनना चाहिए, जो ना सिर्फ मदद करने की इच्छा रखें बल्कि जरूरत पड़ने पर मदद भी कर सकें।

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Kahani पैसे की चाह

This kahani or story is based on a old person want more and more money

यह कपड़ा व्यापारी था। कारोबार में बहुत ही चतुर था। उम्र भी काफी हो चली थी। लेकिन पैसा कमाने में उसका मन नहीं भरता था। व्यापारी के दो लड़के थे, जो धंधे में उसका हाथ बाँटते थे।

लेकिन इन लड़कों के कारोबार संभाल लेने के बाद भी व्यापारी ने दुकान जाना बंद नहीं किया। उसमें और पैसा कमाने की लालसा बढ़ती ही जा रही थी। व्यापारी की इस आदत से लड़के परेशान थे। वे चाहते थे कि पिताजी अब घर में घर पर आराम करें।

एक दिन लड़कों ने एक पंडित को बुलाया और कहा कि वह उनके पिता को लंबी तीर्थयात्रा पर ले जाएँ, ताकि कारोबार और पैसा कमाने की तृष्णा से पिता का मन हटाने में मदद मिल सके। लड़कों के इस अनुरोध पर पंडित राजी हो गया और बूढ़े व्यापारी  को तीर्थ करने के लिए निकल पड़ा।

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पंडित और व्यापारी करीब-करीब साल भर तक तीर्थयात्रा पर इधर-उधर घूमते रहे। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, गंगासागर, द्वारका सहित भारत में जितने भी तीर्थ थे, उनमें से कोई नहीं छोड़ा। लेकिन व्यापारी के मन में से धन कमाने का लोभ अभी भी खत्म नहीं हुआ था।

घूमते-घूमते व्यापारी और पंडित बनारस पहुंचे। पंडित व्यापारी को गंगा किनारे श्मशान घाट भी दिखाने ले गया। श्मशान घाट देखते ही व्यापारी के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। मानो जैसे उसे यहाँ बहुत कुछ मिल गया हो।

यह देख पंडित को हैरानी हुआ। व्यापारी ने पंडित से कहा, “तूम मुझे यहां पहले क्यों नहीं लाए? मैंने सारी जिंदगी कपड़े का व्यापार किया, लेकिन आज मुझे यहां आकर लग रहा है कि मैंने कपड़े का व्यापार कर गलत किया।

मुझे तो लकडियो का व्यापार करना चाहिए था। देखो, यहां लकड़ियों की कितनी भारी मांग है। अगर मैं यहां लकड़ी का व्यापार करता तो काफी पैसा कमा लेता।” व्यापारी की बात सुनकर पंडित आवक रह गया।

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आखिरी में कुछ सब

पढ़ने व देखते रहे हिंदी कहानियां और जीवन को समझते रहे। जीवन में बहुत सी सिख है। पर हिंदी कहानी के माध्यम से हम दूसरी की गलती से सिख सकते है। इसलिए भी हिंदी कहानी पढ़ना चाहिए।

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2 COMMENTS

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