टोपीवाला और बंदर की कहानी monkey and cap seller story in hindi

हेलो दोस्तों, आज हम टोपीवाला और बंदर की कहानी (monkey and cap seller story in hindi) को पढ़ने वाले है। बंदर और टोपीवाला की कहानी काफी मजेदार और ज्ञान की कहानी में से एक है।

टोपीवाला और बंदर की कहानी (topiwala aur bandar story in hindi) भले ही पुरानी कहानी में से एक है लेकिन आज भी इसे बहुत पसंद किया जाता है। और इस कहानी से बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

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टोपीवाला और बंदर की स्टोरी

monkey and cap seller story in hindi
monkey and cap seller story in hindi

बहुत समय पहले की बात है। किसी दूर एक गांव में एक टोपी बेचने वाला रहता था। उसका मुख्य काम टोपी को बेचना था। वह गली-गली घूम कर टोपी बेचा करता था और उससे बस वह इतना ही पैसा कमा लेता था जितने में वह अपने पेट को भर सके। तभी वह अपने जीवन से बहुत ही खुश था।

जब वह टोपी बेचने वाला टोपी बेचने जाया करता था तो उसके साथ एक थैला रहता था । उस थैले में वह अपने सारे टोपी को रखता था ।

एक टोपी खुद पहनता और एक टोपी को अपने हाथ में लेकर लोगो को आवाज देता, टोपी ले लो…। एक बार की बात है। बहुत ही गर्मी का दिन था। मानो आकाश से आग बरस रही थी।

टोपी बेचना वाला एक रास्ते से गुजर रहा था। उसे बहुत ज्यादा गर्मी भी लग रही थी। रास्ते में ही उसे एक बहुत ही घाना पेड़ नजर आया। उस पेड़ के नीचे बहुत ही ठंडा था। पेड़ के नीचे पूरा छाया था। सूरज की एक भी रोशनी नहीं पड़ रही थी।

टोपी वाले ने सोचा, मैं बहुत ही थक गया हूँ। इस धुप में आगे जाना भी मुश्किल है। मुझे यही इस पेड़ के नीचे कुछ देर आराम कर लेना चाहिए।

यही सोच कर टोपी वाला उस पेड़ के नीचे छाव में बैठ गया। सारा दिन वह इधर से उधर घुमा हुआ था। उसे नींद लग गई। वह अपने पास टोपी का थैला रख कर सो गया।

उस पेड़ के ऊपर कुछ बंदर मौजूद थे। बंदरो ने देखा कि यह व्यक्ति अपने सर में टोपी लगा कर सोया हुआ है। हमें इसकी थैला में देखना चाहिए की उसमे क्या है?

उसके बाद बंदर उस व्यक्ति के पास आकर उसके थैला को देखने लगे। लेकिन उसके थैला में से बंदरो को कुछ भी खाने को न मिला। थैला में खाने को कुछ नहीं था लेकिन टोपिया मौजूद थी।

बंदरो में टोपी को अपने हाथ में लेकर देखने लगे। उन्हें इसके बारे में कुछ भी मालूम नहीं था। बंदर नकलची होते है। बंदरो ने देखा की टोपी वाले ने अपने सर में टोपी पहन रखा है। सभी बंदर भी टोपी को पहन कर इधर-उधर घूमने लगे। इसके बाद वह बंदर पेड़ पर चढ़ कर बैठ गए।

टोपी वाले की नींद खुल गई। उसने अपने थैला को देखा। उसमे एक भी टोपी मौजूद नहीं थी। टोपी वाला इधर-उधर देखने लगा।

उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसके सारे टोपी कहा चले गए। अगर कोई टोपी का चोरी करेगा तो टोपी को थैला के साथ लेकर जाएगा। पर थैला तो वही खाली पड़ी है।

एका-एक टोपी वाले का नजर पेड़ के ऊपर गया। वह देखकर परेशान रह गया। उसके सारे टोपी को बंदरो ने पहन रखा था। टोपी वाला चिंते में पड़ गया।

आखिर अपने टोपी को बंदरो से कैसे हासिल करे। टोपी वाले ने बंदरो को डराने की कोशिश करता। बंदर टोपी वाले को ही डराने लगते है। टोपी वाले को एक बात याद आया कि बंदर नकलची होते है।

जैसा वह इंसान को देखते है वैसा ही करने की कोशिश करते है। टोपी वाले ने अपने सर के टोपी को उतारा, इसको देखकर बंदरो ने भी अपनी टोपी को सर से उतार दिया।

यह देखकर टोपी वाला मन ही मन बहुत खुश हुआ। उसके बाद टोपी वाले ने बंदरो को दिखते हुए अपने टोपी को जमीन पर रख दिया, और थोड़ा दूर हो गया। अब क्या था, सारे बंदर पेड़ से नीचे उतरे और अपने-अपने टोपी को जमीन पर एक स्थान पर रख दिए। फिर सारे बंदर पेड़ पर चढ़ गए।

अच्छा मौका पाकर टोपी वाले ने अपने सारे टोपी को अपने थैला में रख कर वहाँ से नौ दो ग्यारह हो गया।

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टोपी वाले और बंदर की कहानी (monkey and cap seller story in hindi) को पढ़ हमें सीख मिलता है कि हमें अपने बुद्धि का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ ही हम किसी भी मुश्किल को अपनी सूझ-बूझ से हल कर सकते है।

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