best story of Hindi Rahim and his grandmother

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कहानी- रहीम और उसकी दादी

एक बार की बात है एक गाँव में एक लड़का रहता था. उसका नाम रहीम था वह अपनी दादी के साथ रहता था, वो और उसकी दादी बहुत गरीब थे. बचपन में ही रहीम के माँ, बाप की मौत हो गयी थी रहीम को उसकी दादी ने ही पालपोस कर बड़ा किया, रहीम अपनी दादी से और दादी रहीम से बहुत प्यार करते थे. दोनों का एक दुसरे के अलावा कोई नही था,

दोनों ही एक दुसरे का सहारा थे. इसी कारण एक दुसरे से बहुत प्यार भी करते थे और एक दुसरे को सँभालते भी थे. किसी और के ना होने के कारण दादी को खुद को और रहीम को सँभालने में बहुत सी दिक्कते झेलनी पड़ती थी,

ऊपर से घर में कोई कमाने वाला भी नही था जो उनकी माली हालत को ठीक रख सके. एक दादी ही थी और वो भी बहुत बूढी हो चुकी थी कैसे कैसे करके तो वो रहीम और अपनी दो वक्त की रोटी का इंतज़ाम करती थी.

रहीम छोटा था वो कोई काम भी नही कर सकता था जिससे कुछ पैसे कमाए जा सके. इन्ही सब की वजह से दोनों को बहुत तकलीफ होती थी, पर दोनों जब एक दुसरे को देखते तो ये सोच कर खुश हो जाते की स्थति कैसी भी हो कम से कम दोनों साथ में तो है.

एक बार ईद थी, रहीम के सारे दोस्त नये नये कपडे पहनकर बाज़ार से मिठाइयाँ और खिलौने खरीदने जा रहे थे, तभी रहीम के दोस्त रहीम के घर के बाहर आ कर उसे साथ में बाज़ार चलने के लिए बुलाने लगे.दोस्तों की आवाज सुनकर रहीम घर से बाहर निकला और अपने दोस्तों को देख कर उसने कहा की तुम लोग रुको मैं दादी से खिलौनों और मिठाइयों के लिए पैसे लेकर आता हूँ. इतना कहकर वो घर के अंदर चला गया दादी से पैसे मांगने,

और उसके दोस्त वही पर उसका इंतज़ार करने लगे. रहीम जब घर के अंदर गया तब दादी चूल्हे पर रोटी सेंक रहीं थीं, रोटी सेंकते वक़्त दादी के हाथ काफी जल जाते थे, और दादी पैसे बचाने के लिए बाज़ार से चिमटा नही खरीदतीं, यह देखकर रहीम कुछ सोचने लगा पर उस समय उसने अपनी दादी से कुछ नही कहा.

दादी की नजर रहीम पर पड़ी, रहीम चुपचाप खड़ा दादी को देख रहा था, तभी बाहर से फिर रहीम के दोस्तों ने उसे आवाज लगायी तब दादी ने रहीम से पुछा की बाहर कौन तम्हे आवाज लगा रहा है, रहीम ने बताया की बाहर उसके दोस्त खड़े है जो ईद पर बाज़ार से मिठाईयां और खिलौने खरीदने जा रहे. दादी के पास ज्यादा पैसे तो नही थे लेकिन

, दादी ने अपने दुप्पटे का एक कोना पकड़ा जिसमे वो कुछ पैसे बांधकर रखती थी उन्होंने उसे खोलकर उसमे रखे कुछ पैसे निकाल कर रहीम को दे दिए और कहा की जाओ अपने दोस्तों के साथ ईद की मिठाईयां लेलो और पैसे बचे तो खिलौने भी खरीद लेना.

रहीम दादी से पैसे लेकर अपने दोस्तों के साथ बाज़ार चला गया, वहाँ पर तरह तरह की मिठाईयां, खिलौने बिक रहे थे रहीम के दोस्तों ने कहा की चलो अब ईद की मिठाईयां खाते है और खिलौने खरीदते है ,रहीम उस समय कुछ सोच रहा था उसने अपने दोस्तों की बात का कोई जवाब नही दिया.उसके दोस्त अपनी अपनी पसंद की मिठाईयां खरेद कर खाने लगे पर रहीम ने कोई भी मिठाई ना खरीदी और ना खाई,

सब उससे कहने लगे तुम क्यों कोई मिठाई नही खरीद कर खा रहे हो तो रहीम ने जवाब दिया मैं अभी ही घर से खाना खा कर आया हूँ मेरा पेट भरा हुआ है मुझे मिठाई नही खानी है.उसके दोस्तों ने उसकी बात मान ली और फिर दूसरी ओर जाने लगे.

थोड़े समय बाद रहीम के दोस्तों से एक खिलौने की दूकान देखि और वहाँ जाने लगे रहीम भी उनके साथ गया, सभी ने अपने लिए तरह तरह के खिलौने खरीदे थोड़े देर बाद रहीम की बारी आई रहीम के दोस्तों ने फिर उससे पूछा तुम कोई खिलौना क्यों  नही ले रहे तो रहीम ने जवाब दिया मेरे पास इतने सारे खिलौने तो रखे हुए है मैं और खिलौनों को लेकर क्या करूँगा, तो रहीम के दोस्तों  ने कहा तम्हारी दादी ने तो तम्हे पैसे दिए है फिर तुम क्यों नही कुछ खरीद रहे हो,

तो रहीम ने कुछ नहीं बताया और वो दूसरी ओर जाने लगा. रहीम कोई दूकान की तलाश में था जो उसे दिख नही रही थी , आगे चलाकर रहीम को एक दूकान दिखी जिसपर रसोई घर का सामान बिक रहा था.

रहीम तुरंत ही उस दूकान के अंदर कुछ खरीदने चला गया उसके दोस्त ये देखकर सोचने लगे की रहीम बर्तन की दूकान में क्यों गया है,

थोड़े समय बाद रहीम उस दूकान से बाहर निकला उसके हाथ में एक चिमटा था. उसके दोस्तों ने उससे सवाल किया की तमने ना को मिठाई खायी ना और ना ही कोई खिलौना खरीदा ,तो फिर तुमने ये चिमटा क्यों और किसके लिए खरीदा.

दोस्तों के ये सवाल सुनकर रहीम ने जवाब दिया की मेरी दादी के हाथ रोटी बनाते समय जल जाते है ये चिमटा मैं अपने दादी को ईद पे तोहफे में दूंगा. अब मेरी दादी के हाथ नहीं जलेंगे.

इतना कहकर रहीम अपने दोस्तों को छोड़कर अपने घर की ओर भागने लगा, जब रहीम घर पहुंचा तो दादी किसी काम में व्यस्त थी.रहीम ने दादी को आवाज लगायी दादी रहीम की आवाज सुनकर बाहर आई और वो रहीम के हाथ में चिमटा देखकर हैरान हो गयी.

दादी ने रहीम से पूछा तुम तो मिठाई और खिलौने लेने गये थे तो फिर ये चिमटा क्यों लेकर आ गये, दादी के सवाल पर रहीम ने दादी के जले हुए हाथ को अपने हाथ में लिया और बोला दादी ये चिमटा आपके लिए है अब आपके हाथ रोटी बनाते वक़्त नही जलेंगे

छोटे रहीम की ये बात सुनकर दादी की आँखों से आंसू निकल आये दादी की आँखों में आंसू देख रहीम की भी आँखे भर आई और दोनों ने एक दुसरे को गले लगा लिया.

कहानी से सीख– हमने खुद के भलाई के साथ-साथ दूसरों की भलाई के बारे में जरूर सोचना चाहिए।

the moral of story of Hindi Rahim and his grandmother is, We must think about our own well being as well as the well-being of others.

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