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Best adventure stories in hindi | रोमांचक कहानियाँ हिंदी में

short and best adventure stories in hindi. बहादुरी की कहानी को पढ़ने से हमारे अंदर भी बहादुरी की सोच बढ़ जाती है।

अगर आप भी adventure story की तलाश कर रहे है। पढ़ने के लिए तो हमने यहाँ पर adventure stories को हिंदी में लिखा है। आप इस सभी को पढ़ सकते है।

बहादुर दर्जी की adventure story in hindi

adventure stories in hindi

कही दूर एक दर्जी रहा करता था। वह दर्जी कपड़े को सील कर पैसा कमाया करता था। वह बस इतना ही पैसा कमा पाता था, जितने से उसका जीवन चल सके। वह दर्जी खुद को बहादुर मानता था।

एक दिन वह दर्जी अपने घर दही लेकर आया। उसने अपने दही को रख दिया और काम करने लगा। उसने सोचा कि काम ख़त्म करने के बाद वह मजे से दही खाएगा।

कुछ देर के बाद दर्जी का काम ख़त्म हो गया तो वह अपने दही को खाने की ओर बढ़ा। पर दही में अबतक बहुत सी मक्खी बैठी हुई थी। दरजी को उन मक्खी पर गुस्सा आ गया।

उसने एक कपडे से मक्खियों को मारा। कपडे से मारने के कारण सात मक्खी तुरंत ही जमीन पर गिर कर मर गई।

इससे दर्जी बहुत ही खुश हुआ। उसे ख़ुशी हो रही थी कि उसने कैसे एक बार में साथ को मार गिराया। अब उसके मन में बैठ गया कि वह एक बहादुर है।

उसने अपने कपडे पर लिखा। एक वार, साथ शिकार। वह अपने बारे में सभी को बताया करता था कि वह एक बार में सात को मार सकता है।

यह सुनकर सभी ही उसको बहादुर मानने लगे थे। एक बार उस राज्य के राजा को एक दानव से परेशानी हो रही थी।

वह दानव राज्य के पास ही एक जंगल में रहा करता था। वह समय-समय पर राज्य पर हमला करता और लोगो को मार कर खा जाता है।

एक दिन राजा को पता चला कि राज्य में एक ऐसा बहादुर है। जो कि एक वार में साथ शिकार करता है।

राजा को लगा कि यही वह बहादुर है जो कि हमें उस दानव से आजाद करा सकता है। अगले दिन ही राजा से उस बहादुर दर्जी को अपने दरबार में बुलाया।

यह खबर सुनकर दर्जी रात भर सो न सका। उसे खुद पर बहुत ही गर्व हो रहा था।

अगले दिन दर्जी दरबार में पहुंच गया। राजा से अपनी सारी समस्या दर्जी से कह डाली। दर्जी ने कहा, आप चिंता न करे। उस दानव को मैं कुछ समय में ही हरा दुगा।

राजा ने दर्जी से कहा, तुम अपने साथ कुछ सैनिक और हाथिया लेकर जाव। दर्जी ने तुरंत ही मना कर दिया। उसने कहा, मैं अकेले ही उसे हरा दूंगा।

दर्जी अगले दिन ही अपने साथ पनीर का टुकड़ा और चिड़िया लेकर चल दिया। वह दर्जी जब जंगल में पंहुचा तो उसके सामने वह दानव आ खड़ा हुआ।

दर्जी ने कहा, मैं तुम्हे मारने आया हुआ। आज मैं तुम्हे मार दुगा। दानव ने कहा, तुम मुझे कैसे मार सकते हो?

अगर तुम्हे विश्वास नहीं है तो मुकाबला कर के देख लो। दानव ने एक बड़ा सा पत्थर उठा कर दूर फेक दिया। दर्जी ने कहा, बस तुम इतना ही दूर फेक पाए।

यह कहते हुए दर्जी ने धीरे से अपने जेब में से चिड़िया को निकला और ऊपर उछाल दिया। चिड़िया आकाश में उड़ गई। फिर वह कभी निचे नहीं आई।

दानव इस दर्जी से थोड़ा डारने लगा। फिर दानव ने एक पत्थर को इतना दबाया कि उसमे से पानी निकल गया।

दर्जी ने अपने जेब में से पनीर को निकला और एक ही हाथ से दबाया तो बहुत सारा पानी निकल आया। अब दानव ने अपना घुटने टेक दिया।

दानव ने कहा, आप मुझे न मारे। दर्जी ने कहा, मैं तुम्हे एक ही शर्त पर नहीं मरुँगा। वह शर्त है कि तुम इस जंगल को छोड़ कर कही दूर चले जाव।

दानव ने इस शर्त को मान लिया। उसने अगले पल ही इस जंगल को छोड़ दिया। दर्जी ने आकर राजा को यह खबर दिया।

राजा इस खबर से बहुत ही खुश हुए। उन्होंने राजकुमारी की शादी इस दर्जी से कर दी।

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बहादुर लड़के की कहानी

एक बार की बात है। एक गांव में अचानक चोरी बढ़ने लगी। उस गांव में हर रात किसी न किसी के घर चोरी हो जाया करती थी। चोर इस तरह से चोरी कर रहे थे कि पुलिस भी चोरो को पकड़ नहीं पा रही थी।

गांव के लोग इससे परेशान रहने लगे। उन्हें अपने घर को बचाने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता था। उस गांव में दो चौकीदार भी रखे गए। फिर भी चोरी कम नहीं हो रही थी।

उस गांव में एक लड़का रहा करता था जिसका नाम धर्मराज था। धर्मराज की उम्र अभी मात्र 9 साल थी। धर्मराज एक बहादुर लकड़ा था। वह भी बहुत समय से चोरो को पकड़ना चाहता था।

एक दिन उसे पता चला कि चोर किस रास्ते से आते है। उसने अगली रात को अपने हाथ को थोड़ा सा काटा और उस रास्ते के एक पेड़ के ऊपर चढ़ कर बैठ गया।

उसने अपने हाथ को इस लिए काटा था ताकि उसको नींद न आए। जब आधी रात हुए तो करीब 5 चोर गाँव में उस रास्ते से घुस गए।

जब वह चोर गाँव में घुस गए तो धर्मराज ने आधे से अधिक गाँव वालो को जगा दिया। वह अपने साथ बहुत से गाँव वालो को लेकर उस रास्ते के पास छुप गया।

जिस रास्ते से वह चोर जाने वाले थे। आखिर कर वह चोर चोरी करने के बाद वहाँ आ ही गए। फिर क्या था?

सारे गांव वालो ने मिलकर सभी चोर को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। सारे गांव वाले धर्मराज की हिम्मत की तारीफ कर रहे थे।

आप सभी को बहादुरी का कार्य करना या बहादुर बनने की चाह अंदर ही अंदर जरूर होगी। लेकिन आपको कम ऐसे मौके मिलते है जब आप अपने आप को बहादुर साबित कर बाते हो।

वैसे बहादुरी के लिए हमारे पास विवेक होना चाहिए, चलिए जानते है कैसे एक छोटी सी गिलहरी ने विवेक से काम लेकर शेर को मात देने में सफलता हासिल किया।

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गिलहरी की जीत

किसी जंगल में एक शेर रहता है। वह आए दिन जंगल के छोटे बड़े जानवरो का शिकार करता था। वह अपने आपको को बहुत बहादुर मानता था। वह अक्सर अन्य जानवरो को चुनौती देता रहता है कि उससे ज्यादा शूरवीर इस जंगल में कोई नही।

बड़े से बड़े जानवर शेर बाते सुनकर सिर झुकाए रहते थे। एक दिन एक गिलहरी ने जब शेर को दहाड़ते और ललकारते सुना तो कुछ समय के लिए वह हैरत में पड़ गई सोचने लगी जंगल में तो और भी विशाल और खतरनाक जानवर है जो शेर को मुकाबले में शिकस्त दे सकते है। उसने मन ही मन में सोचा कुछ न कुछ मुझे की करना पड़ेगा।

शेर के जाने के बाद बाकी जानवरो से बोल पड़ी, क्या आप लोगो में कोई ऐसा नहीं जो शेर का मुकाबला कर सके? अगर सब के सब कायर हो तो मैं शेर से मुकाबला करना चाहूंगी फिर तय होगा की शेर कितना बड़ा शूरवीर है ?

गिलहरी के ऐसे बोले जाने पर सभी जानवर ठहाके मारने लगे। लोमड़ी बोली अगर तू मुकाबला कर सकती है तो मैं भी मुकाबले में शामिल होना चाहूंगी
मैं अपनी कुशाग्र बुद्धि से शेर को हरा दूंगी।

अब पेड़ पर उछल कूद मचाते हुए बंदर नीचे आ धमका और बोला “मैं भी इस मुकाबले में शामिल होना चाहता हूं, मै इसके लिए पेड़ो से फलों को फेक कर शेर को हरा दूंगा”।

अब हाथी से कहा रहा गया उसने कहा, मैं भी मुकाबला करना चाहता हूं। मैं अपने बड़े बड़े पैरो से दौड़ा दौड़ा कर शेर को फुटबॉल बना दूंगा। इस तरह से सब के सब एकजुट होकर शेर की गुफा की ओर बढ़ने लगे।

सबको अपनी ओर बढ़ता देख शेर को लगा कि वो उसकी प्रशंसा करने के लिए आ रहे। उन्हे देखकर वह फिर अपने कड़े मिजाज में बोलने लगा। तुम सब के सब क्यों एक साथ आ रहे हो, अकेले आने से क्या तुम्हे डर लगता है?

इस पर हाथी बोल पड़ा कैसा और कहा का डर हम तो आपसे मुकाबला करने आए है। आपने हम लोगो पर बहुत राज्य कर लिया अब हम आपके बिलकुल भी अधीन नहीं रहेंगे है।

अगर आपको हमारा राजा बना रहना है तो हमसे मुकाबला करना होगा। शेर ने दहाड़ते हुए कहा कौन करेगा मुझसे मुकाबला अरे मूर्खो आगे बढ़ो।

फिर क्या था, सब के सब शेर की ओर बड़े चले आ रहे थे सबके चेहरे पर गुस्सा था। शेर को कुछ समझ में नहीं आया आखिर माजरा क्या है। सब के सब उससे बगावत पर कैसे उतार आए।

तभी सभी जानवरो के लीडर के रूप में गिलहरी आगे बढ़ी और बोली क्यों तुमने हम सबको ललकारा था न कि हमारे में से कोई नही है जो तुम्हे मात दे सके। आज तो देखो मुझ जैसा छोटा सा जीव तुझे ललकार रही हूं।

शेर एक कदम आगे बढ़ कर गिलहरी को अपने पंजे में लेना चाहता था। लेकिन सबको अपनी तरफ तेजी से आगे बढ़ता देख वह भाग खड़ा हुआ। सभी जानवरो ने काफी दूर तक उसका पीछा किया लेकिन वह दूसरे जंगल में जाकर छुप गया।

अंत में सभी जानवर एकजुट होकर शेर के जानें की खुशी मनाई और गिरहरी को शाबाशी दी।

इस कहानी से हमे शिक्षा मिलती है कि हमे किसी भी हालत में खुद को कम नहीं आंकना चाहिए। ये हमारी सबसे बड़ी भूल होती है।

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हलवाई की पत्नी

एक हलवाई था उसकी जलेबिया दूर-दूर तक मशहूर थी। उसकी बनाई गई जलेबिया लेने के लिए लोग दूर-दूर से आते थे। एक दिन शहर से एक अजनबी व्यक्ति उस हलवाई के पास पहुंचा और बोला आपकी जलेबिया खाकर कुछ लोग बीमार हो गए है आपको इसके लिए जेल जाना होगा।

बेचारा हलवाई डर के मारे सहम गया उसके हाथ पैर फूल गए। वह हाथ जोड़कर खड़ा होकर हो गया बोला आप मेरी दुकान की तलाशी ले लीजिए आपको एक मक्खी भी नजर नहीं आयेगी। अगर मिल गई तो आप जो कहेंगे मैं हार जाऊंगा।

वह सरसरते हुए हलवाई की दुकान में घुसा और कुछ जलेबी के टुकड़े दिखाते हुए बोला ये क्या है इसमें देखो चार की चार मक्खी लिपटी हुई है। अब तो बेहद दर गया। अब इस अजनबी ने हलवाई को धमकाते हुए कहा कि जेल जाने के लिए तैयार हो जाओ।

उसने कहा मुझे कल तक का समय दीजिए मैं सिद्ध करके दिखा दूंगा की मैने कुछ गलत नही किया। उसकी पत्नी थोड़ी बुद्धिमान थी वो बोली कल मैं भी चलूंगी आपके साथ दुकान पर आप देखना मैं कैसे उसे सबक सिखाऊंगी।

अगली सुबह वह अजनबी वहा पहुंचा और बोला क्यों तैयार हो ना जेल जाने के लिए इस पर इसकी पत्नी बोली जिन जलेबियो में मक्खी थी वो तो हमारे दुकान की है ही नही तो हम क्यों जाए जेल।

अगर आपको भरोसा नहीं तो आज फिर चेक करके देख लो इस बार फिर वो गया दुकान के अंदर और जब बाहर आया तो उसके हाथ से खून बह रहा था। उसके चेहरे पर डर था।

वह बोला मुझे माफ कर दो मैंने तुम पर गलत आरोप लगाया है कि तुम गंदगी से जलेबिया बनाते हो ऐसा करके मैं तुमसे पैसा ऐंठना चाहता था। पिछली बार जब मैं तुम्हारी दुकान के अंदर गया तो मैंने अपने जेब में कुछ मक्खियां मार कर एक पैकेट में रखा था।

उसे निकाल के मैने जलेबियों के सिरे में डूबो दिया। इस बार भी ऐसा किया था लेकिन इस बार जैसे ही मैंने हाथ पैकेट में डाला मुझे एक बिच्छू ने डंक मार दिया। मैंने तुम्हारे लिए गड्ढा खोदेने की कोशिश की और उसके बदले मैं ही उसमें जा गिरा।

हलवाई को अब समझ में आ गया था कि ये सब उसकी पत्नी का किया कराया है उसी ने कुछ ऐसा जुगाड़ किया है जिससे आज यह धूर्त अपनी शराफत दिखा रहा है।

हलवाई की पत्नी हलवाई को देखकर धीरे से मुस्कुराई। उसकी पत्नी ने उस अजनबी की हजामत करने के लिए पुलिस भी बुला रखा था। पुलिस ने डंडे बरसाते हुए उसकी ओर आगे बढ़ा।

हलवाई की पत्नी ने फुसफुसाते हुए कहा देखा मैने कैसे इनको सबक सिखाया। कल रात जासूसी करते हुए मैं इसके घर पहुंच गई मेरी नजर खुटे पर पड़ी। इसके पैंट में मुझे एक पैकेट मिली जिसमें मरी हुई कुछ मक्खियां थी।

मैंने इसको बदल दिया और उसमे बिच्छू रख दिया फिर जो हुआ वो तो आपके सामने है।

इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि किसी के साथ गलत नहीं करना चाहिए क्योंकि गलत करने का नतीजा गलत होता है।

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