best hindi child story and stories with moral in hindi language हिंदी बाल कहानी

हिंदी चाइल्ड स्टोरी (hindi child story) को काफी लोग खोजते है। इन हिंदी चाइल्ड स्टोरी (hindi child story) बच्चो के लिए काफी अच्छा होता। है वैसे तो बहुत से हिंदी स्टोरी होते है पर उन हिंदी स्टोरी को बच्चे नहीं पढ़ सकते है।

इसेक पीछे बहुत से कारण हो सकते है। वही हिंदी चाइल्ड स्टोरी (hindi child story) ऐसी स्टोरी या कहानी होती है जिसे बच्चे और बड़े दोनों हो पढ़ा सकते है।

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हिंदी चाइल्ड स्टोरी- आधी धुप-आधी छाव

हिंदी चाइल्ड स्टोरी
हिंदी चाइल्ड स्टोरी

एक दिन बादशाह अकबर के दरबार में एक फरियादी आया और बोला- हुजुर! मुझे अपनी बेटी की शादी के लिए कुछ धन चाहिए. यदि आप दे सके तो बड़ी मेहरबानी होगी. यह कहकर फरियादी वहां से चला गया.

उसकी बात सुनकर बादशाह अकबर सोच में पड़ गए. इस जरूरतमंद को कितना धन दू की इसे धन कम भी न लगे और फिजूल खर्ची भी न हो. इसके लिए मुझे इसकी परीक्षा लेनी चाहिए और उसी के आधार पर धन देना चाहिए.

अकबर इतना सोच ही रहे थे की तभी फरियादी फिर आया.

अकबर बोले- ऐसा करो, तुम आज से ठीक एक महीने बाद आना लेकिन मेरी एक शर्त है की जब तुम आओ उस समय आधी धुप आधी छाव हो.

तब मै तुम्हे धन दे दूंगा. फरियादी यह सुनकर परेशान हो गया और परेशान होकर बीरबल के पास पंहुचा.

फरियादी बोला- महाराज की पहेली तो मेरी समझ से बाहर है, हुजुर. यह सुनकर बीरबल बोले- क्या हुआ तुम इतने परेशान क्यों हो.

फरियादी राजा की बात बीरबल के सामने दोहारा देता है. तब बीरबल बोले- चिंता मत करो तुम मेरे पास एक महीने बाद आना. तब मै तुम्हे उपाय बताऊंगा. अभी तुम घर जाओ.

फरियादी एक महीने बाद बीरबल के पास आया.

बीरबल बोले- वह चारपाई देख रहे हो! कुछ मत करो. बस उसे तुरंत अपने सिर पर उठाकर, बादशाह के पास जाओ.

फरियादी बोला- यह क्या कह रहे है. मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है, चलिए यह भी कर के देखता हूँ.

फरियादी चारपाई सिर पर उठाकर बादशाह अकबर के दरबार में पंहुचा. फरियादी बोला- हुजुर! आपने मुझे एक महीने बाद आधी धुप व आधी छाँव में आने को कहा था. लीजिये मै आ गया.

यह देखकर बादशाह अकबर बोले- वाह! क्या तकीब अपनाई तुमने. मै तुम्हारी बुद्धिमानी देखकर बहुत खुश हुआ. मै तुम्हे एक लाख सोने के मोहरे देता हूँ.

अपनी बेटी की शादी खूब धूम–धाम से करो. परन्तु यह तो बताओ, यह चारपाई वाली बात किसने सुझाई तुम्हे?

तब फरियादी बोला- हुजुर, बीरबल ने मुझे यह चारपाई वाला सुझाव दिया था.

बादशाह बोले- वाह!, बीरबल की बुद्धिमानी का भी कोई जवाब नहीं.

moral of the Hindi child story: हमें कोई भी काम बुद्धिमानी से करना चाहिए.

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छोटी सी शरारत भयंकर परिणाम- Hindi child story

Hindi child story train
Hindi child story train

जुलाई 2001 के समाचार पत्रों में एक मूर्ख की मूर्खतापूर्ण करतूत की खूब चर्चा रही। हुआ यूँ कि वाराणसी के समीप एक रेलवे स्टेशन पर एक खाली रेलगाड़ी खड़ी हुई थी.

उसका इंजन चालू था, पर उसमें ड्राइवर नहीं था। शायद वह किसी काम से उतर कर नीचे चला गया था।

प्रात : काल का समय था। उस समय तीन बजकर तीस मिनट हुए थे। इसी कारण प्लेटफार्म पर भीड़ नहीं थी। प्लेटफार्म पर घूमते हुए सत्रहवर्षीय राजेश नामक लड़के को अचानक शरारत सूझी।

वह उस खाली गाड़ी के इंजन में चढ़ गया और कलपुर्जी से छेड़-छाड़ करने लगा। इंजन के पुर्जे के बारे में उसे कुछ भी ज्ञान नहीं था। एक पुर्जे को छेड़ते ही गाड़ी पीछे को चलने लगी। अब तो उसे डर लगा।

तब उसने कई कलपुर्जे ऐंठकर गाड़ी रोकनी चाही, पर गाड़ी तेज रफ्तार से पीछे को ही दौड़ती रही। गाड़ी रोकना तो उसे मालूम नहीं था। फिर गाड़ी कैसे रुकती।

सभी लोग हैरान थे कि ड्राइवर के बिना गाड़ी कैसे दौड़ी जा रही है? रास्ते में स्टेशनों पर बिना रुके वह गाड़ी लगातार पीछे को दौड़ती रही।

रेलवे अधिकारी समझ गए कि यह गाड़ी काबू से बाहर हो गई है। यह गाड़ी किसी और गाड़ी से न टकरा जाए, इसकी रोकथाम के भरसक प्रयत्न किए गए।

डेढ़ घंटे तक एक सौ पंद्रह किलोमीटर दौड़ने के बाद इस गाड़ी को रेल पटरी से नीचे उतार कर किसी तरह रोका गया। इस बेकाबू गाड़ी की चपेट में आकर एक व्यक्ति अपनी जान से हाथ धो बैठा।

रेलवे पुलिस का एक कर्मचारी इसे रोकने के चक्कर में गंभीर रूप से घायल हो गया। गाड़ी ने रुकते -रुकते रेल विभाग के एक भवन को गिरा कर मिट्टी में मिला दिया। करोड़ों रुपयों की हानि भी हुई। केवल एक मूर्ख बालक की मूर्खता के कारण।

अपनी इस शरारत के कारण इस लड़के को जेल के सलाखों के पीछे जाना पड़ा। लेकिन काम बिगड़ जाने के बाद अब पछताने से भी क्या लाभ?

यदि वह लड़का अपने इस मुर्खतापूर्ण कार्य के परिणाम के बारे में थोड़ा- सा भी विचार कर लेता, तो इतना भयंकर परिणाम क्यों होता ? क्यों उसे सजा मिलती?

moral of the Hindi child story: मूर्ख लोग परिणाम की चिंता किए बिना कुछ भी कर डालते हैं। इससे वे स्वयं तो मुसीबत में पड़ते ही हैं और दूसरों को भी मुसीबत में डाल देते हैं।

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आज मेरी छुट्टी है hindi child story

आज मेरी छुट्टी है hindi child story
आज मेरी छुट्टी है hindi child story

बच्चे: अरे! आज यह क्या हो गया! आसमान में बादल भी नहीं हैं। आज फिर सूर्यदेव मुँह छिपाकर कहाँ भाग गए हैं। बिलकुल अंधेरा हो गया है।

मोहित: मेरी दादी माँ कह रह थी कि आज सूर्य – ग्रहण लगेगा। विद्यालय मत जाओ, छुट्टी ले लो।

सूर्य: अरे! सब छुट्टी लेते हो, कभी त्योहारों की, कभी गरमियों की, कभी सरदियों की। मैंने एक दिन थोड़ी देर की छुट्टी ली तो इतना कोलाहल क्यों?

आर्यन : सूर्य जी, जब बादल आते हैं तब भी तो आप छुट्टी पर ही रहते हैं।

सूर्य: न-न-न। तब तो बादल मुझे ढक लेते हैं। मैं तो अपना काम करता ही रहता हूँ।

मान्या : काम! आप क्या काम करते हैं? जरा हमें भी बता दीजिए।

सूर्य : वाह! तुम्हें इतना भी नहीं पता? मैं ही तो बादल लाता हूँ। अपनी तेज किरणों से तालाबों , नदियों, समुद्रों का जल सुखाकर भाप बनाता हूँ जो ऊपर की ठंडक से बादल बन जाती है। यही बादल फिर वर्षा लाते हैं।

क्या यह काम नहीं है? और हाँ, वर्षा के दिनों में इंद्रधनुष देखा है कभी?

आर्यन : हाँ-हाँ, क्यों नहीं। जरूर देखा है। हमें इंद्रधनुष बहुत सुंदर लगता है। सात रंग होते है उसमे।

सूर्य: देखो, पानी की बूंदों से जब मेरी किरणें गुजरती हैं तो मैं अपने प्रकाश में उनमें सातों रंग बिखेर देता हूँ। उन्हीं रंगों से ही तो वह सुंदर हो जाता है। जरा बिना रंगों के बनाकर तो देखो, कितना फीका लगता है इंद्रधनुष।

आर्यन: वाह, यह तो आपने नई बात बताई। मुझे सातों रंगों के नाम क्रम से आते हैं- लाल, नारंगी, पीला, हरा, आसमानी, नीला, बैंगनी। मैं अभी रंग भर देता हूँ इस इंद्रधनुष में।

सूर्य: ये तो हुए ऊपर से नीचे आते रंग। अब नीचे से ऊपर जाते रंगों के नाम भी तो बोलो।

आर्यन : बैंगनी, नीला,आसमानी, हरा, पीला, नारंगी, लाल है न सही , सूर्य जी । मैंने अपनी पुस्तक में पढ़े थे और रंग भी भरे थे।

मान्या: मुझे नहीं आते इतने रंगों के नाम, भैया तुम्हीं बता दो ना।

आर्यन: तुम मेरे रंग ले लो और इस बेरंगे इंद्रधनुष में भर दो। तुम्हें नाम भी आ जाएंगे और इंद्रधनुष भी सज जाएगा। उधर देखो, सूर्यदेव सामने आ रहे हैं, लगता है उनकी छुट्टी समाप्त हो गई है। सुनो, घंटी बज रही है, टन-टन-ट -टन।

मान्या: भैया! जरा सूर्यदेव का अपना रंग तो देखो! बिलकुल लाल है। आकाश कितना सुंदर लग रहा है। ऐसा लगता है मानो किसी चित्रकार ने सुंदर चित्र बना दिया हो।

आर्यन: संध्या हो गई है। सूर्य जी अपने घर जाने की तैयारी में हैं। ये अपना कुछ प्रकाश चंद्रमा को देकर घर जाएंगे चलो हम भी चलें।

moral of the Hindi child story: हमें अपना काम करते रहना चाहिए। किसी के उनके काम समय पर करने से ही हमारा जीवन इस धरती पर मुमकिन है।

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अंत में

यह वह कुछ अच्छी और बेहतरीन हिंदी चाइल्ड स्टोरी है जिसको पढ़ने से बच्चो को काफी अच्छी मोरल यानि ज्ञान मिलेगा।

यह सभी हिंदी चाइल्ड स्टोरी (hindi child story) नई और बेहतरीन हिंदी चाइल्ड स्टोरी (hindi child story) है। सभी कहानी के निचे उस कहानी की सीख मिलेगा।

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