हिन्दी नैतिक कहानियाँ ज्ञान और सिख के साथ बच्चों को पढ़ने के लिए hindi moral stories

हिंदी में बच्चों के लिए हिंदी नैतिक कहानियां। hindi moral stories में बच्चो के लिए बहुत अच्छी-अच्छी सिख होती है। इसलिए बच्चे और बड़े सभी को hindi moral stories पढ़नी चाहिए। यहाँ पर जो भी हमें hindi moral stories लिखी है वह काफी दिलचस्प तरीके से लिखी गई हैं।

हिंदी नैतिक कहानियाँ नाम सुनकर ही समझ में आ जाता है कि ऐसी कहानी जो कहानी में नैतिक और सिख हो।

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list of hindi moral stories.

  1. बिल्ली की हत्या का दोष
  2. जन्मदिन का अनोखा तोहफा
  3. मामा और भांजा
  4. बुद्धिमान सियार की कहानी

बिल्ली की हत्या का दोष hindi moral story

hindi moral stories in hindi for education and every class
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एक नगर में एक सेठ रहता था, वो बहुत ही धार्मिक था. वो हमेशा पूजा पाठ में व्यस्त रहता था, उसके लिये पूजा पाठ ही सब कुछ था. उसके अनुसार किसी नास्तिक को कभी कुछ नही प्राप्त हो सकता ये उसका मानना था. उसके लिए तरक्की सिर्फ उसे मिलती जो भगवान् को खुश करता, इसलिए वो काफी पूजा पाठ करता था.

उसकी पत्नी भी धार्मिक थी, उसका बेटा बड़ा हो गया था तो उसे उसकी शादी की चिंता सताने लगी थी. थोड़े दिन में सेठ ने अपने बेटे के लिए लड़की देखना शुरू कर दिया, कुछ लड़कियों को देखने के बाद सेठ को और उसकी पत्नी को अपने बेटे के लिए एक लड़की पसंद आ गयी. सेठ ने अपने बेटे से उस लड़की की शादी करा दी.

शादी के बाद बहू घर में आई वो सभी को बहुत सम्मान देती थी, और पूरे घर का बहुत अच्छे से ख्याल रखती थी. दिन बीतते गए बहू ने रसोई घर का सारा काम अपने हाथ में ले लिया, एक बिल्ली थी जो की हर रोज रसोई घर से सारा दूध पी जाती थी और रखे खाने को भी जूठा कर देती थी. बहू उस बिल्ली से बहुत परेशान रहती थी. उसने काफी दिनों तक बिल्ली की इस हरकत को बर्दाश्त किया.

लेकिन एक दिन वह परेशान हो गयी और रोज रोज बिल्ली की इस आदत से उससे चिढने लगी उसे बिल्ली पर बहुत गुस्सा आता था. एक दिन उसने निश्चय किया की वो बिल्ली को डरा के भगा देगी जिससे वो कभी वापस ना आये. रोजाना की तरह बिल्ली रसोई में दूध पीने और मलाई खाने आई, बहू को चिढ़ तो थी ही उसने जैसे बिल्ली को देखा की वो दूध पी रही है वो आग बबूला हो उठी. बहू के हाथ में बेलन था और उसने गुस्से में बेलन बिल्ली की तरफ फ़ेंक दिया, बहू का भी निशाना चूका नही और बेलन सीधा जाके बिल्ली को लगा.

बिल्ली बड़ी जोर से एक बार चिल्लाई और फिर एकदम चुप हो गयी, बिल्ली की आवाज सुनकर सास बाहर आई और बिल्ली को ज़मीन पर पड़ा देख कर वो डर गयी और बहू से सवाल करने लगी.बहू ने सास को सारी घटना बतायी, बहू के हाथों से चले बेलन से सभी को लगा की बिल्ली मर गयी क्युकी वो ज़मीन पर ही पड़ी रही वहाँ से हिल डुल नही रही थी.

तो सभी को लग गया की बिल्ली मर गयी, सभी कहने लगे की बहू के हाथों बिल्ली की मौत हो गयी. बहू के सर बिल्ली की हत्या का दोष लग गया. बहू को बहतु पछतावा हुआ, लेकिन अब पछताने से क्या होने वाला था.

सेठ ने फ़ौरन ही एक पंडित को अपने घर बुलाया और उन्हें सारी बातें विस्तार से बतायी, पंडित ने भी इसमें अपना फायदा देखा. पंडित ने कहा की ठीक है मैं बहू के सर से बिल्ली की हत्या का दोष हटा दूँगा, उसके लिए पूजा करनी पड़ेगी. सेठ तो पहले से ही धार्मिक था और बहू के सर से दोष हटाने के लिए उसने सभी पूजा पाठ करने की अनुमति दे दी.

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पंडित ने घर में पूजा की, थोड़ी देर बाद पंडित ने कहा की अब बिल्ली को तौलिये.और उसका वजन कीजिये.

सब ये सुनकर हैरान हो गए सबने पंडित से पूछा की ये क्यों इसकी क्या जरूरत, तब पंडित ने सभी को बताया की जितने वजन की बिल्ली थी आपको उतने ही वजन की सोने की बिल्ली दान करनी होगी सब ये सुनकर चौंक गए. बिल्ली का वजन देखने में काफी था, सभी परेशान होने लगे की अब उतने वजन की सोने की बिल्ली दान करनी पड़ेगी तभी बहू के सर से दोष हटेगा.

बहू भी ये सुनकर सदमे में आ गयी और वो चुपचाप वहाँ से हटकर दूसरी ओर जाने लगी, बहू जब दूसरी ओर गयी तो उसकी नजर वहाँ पड़ी जहाँ पर बिल्ली मरी पड़ी थी. उस समय वहाँ बिल्ली नही थी. क्युकी बहू के बेलन मारने से बिल्ली केवल बेहोश हुई थी मरी नही थी.

ये बात उसने जाकर सभी को बतायी तब उस सदमे से सभी बाहर  आये, और बहू ने फैसला किया की आगे से वो अपने गुस्से पर नियंत्रण रखेगी और सोच समझकर काम करेगी.

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जन्मदिन का अनोखा तोहफा hindi moral story

जन्मदिन का अनोखा तोहफा hindi moral stories
जन्मदिन का अनोखा तोहफा hindi moral stories

चमन वन में डॉन शेर का शासन चलता था | वन में रहने वाले समस्त जानवर खेती करते थे |

यएक साल बरसात नहीं हुई | तमाम फसल सुख गई | पुरे वन के जानवर इसी कारण अपने राजा को लगान नहीं दे सके | लगान न मिलने पर शेर गुस्से में लाल पिला होते हुए अपने भालू सेनापति से बोला-तुम सीपाहेयो सहित जाओ और प्रजा से सूद समेत लगान देने से इंकार करे तो उसे पकड़कर राज दरबार में पसे किया जाय |

राजा शेर का हुकम होते ही सेनापति भालू सिपाहेयो के साथ प्रजा के घरो में पहुची | उनसे लगान की माग की | जब लगान न मिला तो उनके घरो में पड़े सामान को जब्त कर लिया और उन्हें पकड कर शेर के पास ले आये |

जब बहुत से जानवरों को पकड़कर राज दरबार में लाया गया और उन्हें शेर के सामने पेश किया गया तब शेर का बेटा चीकू भी वहा मौजूद था | चुकी ने देखा की सभी जानवर बहुत दुखी थे | वे आपस में अपनी बुरी हालत की चर्चा कर रहे थे | उसने उनकी बाते सुनी उनका दुःख जानकार उस की आँखे भर आयी | उसने सभी जानवरों को राजा के दंड से मुक्ति दिलाने का निश्चय किया |

अगले दिन चीकू का जन्मन्दीन था | इस दिन के लिया शेर ने उस से कहा था – ‘बेटा चीकू | अपने जन्म दिन पर जो भी तोफा तुम मांगोगे मिलेगा |’

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अब चीकू ने तमाम जानवरों का दुःख दूर करने के लिया एक चाल चली | वह अपने पिता के पास पंहुचा और चरण-स्पर्स कर बोला –‘’आज मेरा जन्म दिन है आपने मुझे कोई तोफा देने का वचन दिया था | अब में वह तोफा आप लेने आया हू|’’

सुनकर शेर बोला – ओह ! बेटा चिकु मे तो बिलकुल भूल गया था कि आज तुम्हारा जन्मदिन है, चलो सबसे पहले तो हम तुम्हे जन्म दिन पर ढेरो बधाईयाँ  देते है और लम्बी आयु और कामयाबी की प्राथना करते है |

थोड़ी देर बाद चीकू के मुह में केक रखकर शेर बोला – बेटा, अब मांगो तुम्हे अपने जन्मदिन पर कोण सा तोहफा चाहिए|

 चीकू बोला- ‘पिता जी , इन बेचारे गरीबो की छिनी हुई चीजो लोटा दिया जाए |

इन्हें अपने घर जाने की अनुमति दी जाए |

जन्म दिन पर इस तरह के तोहफे की मांग सुनकर शेर का पत्थर दिल मोम बन कर पिघलने लगा | उस कि आखो में हर्ष के आसू छलक आया | फिर उसने अपने बेटे से कहा – चीकू बेटा ,तुने अपने लिया तो कुछ नहीं माँगा | कुछ तो मांग |

इस पर वह बोला – पिताजी , आप प्रसन है तो मुझे पक्का वचन दीजिए की यदि किसी साल फसल न हो तो उस साल लगान वसूल नहीं किया जायेगा इससे मुझे बढ़ी ख़ुशी होगी |

शेर ने ऐसा ही किया |सभी जानवरों को सम्मान के साथ ख़ुशी ख़ुशी आजाद कर दिया | उनकी जब्त चीजों को भी लोटा दिया | भविष्य के लिया फसल न होने पर लगान न लेने का नियम भी तुरंत बन दिया |

अब तमाम जानवर बड़ी प्रसन्ता से चिकु राजकुमार को आशीष देते हुए अपने घरो को लोट अये.

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मामा और भांजा hindi moral story

मामा और भांजा hindi moral stories
मामा और भांजा hindi moral stories

यह कहानी एक मामा और भांजा की है, एक गाँव था उसमे एक सुखीलाल नाम का एक आदमी रहता था, वैसे तो वो पढ़ा लिखा नही था. लेकिन दूसरों के सामने वो ऐसे दिखता था जैसे वो बहुत ही बड़ा विद्वान है और उसे हर चीज़ का ज्ञान है. सुखीलाल वैसे तो बहुत ज्यदा अमीर नही था लेकिन उसे अपना खर्चा पानी चलाने का रास्ता पता था और उसे से वो अपना जीवन व्यतीत करता था.

एक दिन उसकी बहन के घर में कुछ परेशानी हो गयी जिसकी वजह से उसकी बहन ने अपने बेटे राम को सुखीलाल के यहाँ थोड़े दिन रहने को भेज दिया. मामा और भांजा साथ में रहने लगे,राम भी पढ़ा लिखा नही था, उस समय उसके मामा और भांजा पेशवा में रहते थे, पेशवा में विद्वानों का बहुत आदर किया जाता था, सभी को ज्ञान बाटने के लिए मुद्राएँ दी जाती थी.

सुखीलाल भी अपना जीवन उन मुद्राओं को लेकर ही व्यतीत करते थे, एक दिन सभी विद्वानों को महल में राजा के सामने उपस्थित होने को कहा गया. सभी विद्वान् वहाँ जाकर उपस्थित हुए, सभी ने अपने अपने स्थान ग्रहण किये और मुद्राएं लेने की चाह में सुखीलाल भी अपने भांजे राम के साथ महल में चले गए.

राम बहुत ही भोला भाला बालक था उसे झूठ बोलना पसंद नही था वो हमेशा सच की राह पे चलता था. जब सुखीलाल उसे महल ले के गया तो उसने जाने से मना कर दिया, लेकिन सुखीलाल ने जोर ज़बरदस्ती से राम को महल में आने के लिए मना लिया.

जब राजा सभी को मुद्राएं दे रहे थे तो सभी अन्य विद्वान् पंक्ति में खड़े होकर अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे, राम ने अपने मामा से कहा की अआप यहाँ से चलिए यहाँ मुझे कुछ ठीक नही लग रहा अगर कुछ गड़बड़ हुई तो हमरी बहुत बेईज्ज़ती होगी.

लेकिन सुखीलाल ने उसकी एक ना मानी वो राम से कहने लगा की मेरी जुन्दगी इसी से चलती है, तुम्हे खाना भी उन्ही मुद्राओं से मिलती है अगर मैं ये नही लूँगा तो हम क्या खायेंगे और कैसे रहेंगे. राम ने फिर भी अपने मामा को बार बार समझाने का प्रयास किया की झूठ बोलकर मुद्राएं लेना सही नही है हमें यहाँ से जाना चाहिए. मामा ने डाट डपटकर भांजे को चुप करा दिया, राम को मामा की ये बात भी माननी पड़ी और वहाँ पर अपने मामा की बारी आने का इंतज़ार करना पड़ा.

सब कुछ ठीक से चल रहा था, राजा सभी को मुद्राएं दे रहे थे. सब कुछ सुखीलाल के सोच अनुसार ही हो रहा था. धीरे धीरे सुखीलाल की बारी आने वाली थी की तभी वहाँ अचानक पेशवा के प्रतिनिधि आ गए, उन्हें देखकर सुखीलाल थोडा डर गया. लेकिन फिर भी वो वहाँ से गया नही अपनी बारी का इंतज़ार करने लगा.

जब सुखीलाल की बारी आई तो उसे देखकर प्रतिनिधि ने उससे पूछा की आप किस विषय के ज्ञाता हैं मैंने आपको पहचाना नही , इतना सुनते ही सुखीलाल डर के मारे परेशान हो गया और घबराने लगा. सुखीलाल के मुहं से आवाज नही निकल रही थी वो बस “मैं वो”, “मैं वो” ही करता रहा इतना सुनकर प्रतिनिधि समझ गया की ये अनपढ़ है और सिर्फ मुद्राओं की लालच में यहाँ आया हुआ है.

पेशवा के प्रतिनिधि ने कहा की ये बहुत लज्जा की बात है की लोग चंद मुद्राओं के लिए सभी को बेवक़ूफ़ बनाते है, और पढाई का भी मजाक उड़ाते हैं, उन्होंने फिर कहा की जब आप महल में आ ही गयें है तो मुद्रायें लेकर जाईयेगा. हमारे राजा के महल से कोइ खाली हाथ नही जाता, हम भीख के रूप में तुम्हे मुद्राएं दान करते हैं.

भरी सभा में सुखीलाल की बहुत बेईज्जती हुई, अगर उसने राम की बात मान ली होती तो शायद उसके साथ ये सब ना होता. और वो बेईज्ज़त होने से बाख जाता.

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moral of the story: हमें झूठ नही बोलना चाहिए, और कभी कभी वो बातें सुन लेनी चाहिए जो हमारे छोटे हमें कहते हैं.

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कुछ और hindi moral stories

हिंदी कहानी बस कहानी ही नहीं होती है। कहानी पढ़ने पर हम उस कहानी को महसूस करते है। कहानी से हम ऐसे सिख लेते है जो अन्य तरीके से नहीं ले सकते है।

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