बेस्ट परी की कहानी और परी की स्टोरी हिंदी भाषा में बच्चो के पढ़ने के लिए pari ki kahani in hindi

परी की कहानी (pari ki kahani in hindi) पढ़ना और सुनना दोनों की काफी मजेदार और दिलचस्प होता है। परियों की कहानी (pariyo ki kahani in hindi) में एक खास बात होता है कि परी के कहानी में जादू होता है।

परी के पास एक छड़ी होता है जिससे वह कुछ भी कर सकती है। जो हम इंसान कभी नहीं कर सकती है वह परी काफी आसानी के साथ कर सकती है। परी के कहानी में यह जादू के बारे में बताया जाता है। हमने कुछ अच्छी और खास परी की कहानियाँ (pari ki kahani in hindi) लिखी है।

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निशा, अंजलि और परी

Nisha Anjali and pari ki Story
निशा अंजलि और परी की कहानी

एक बार की बात है। एक गाँव में दो लड़की रहा करती थी। एक लड़की का नाम निशा था तो दुसरी लड़की का नाम अंजलि था। वह दोनों लड़की एक ही घर की थी। निशा की माँ अब इस दुनिया में नहीं थी। लेकिन उसके पिता ने दूसरी शादी कर लिए थे। जिसके कारण अब निशा की एक सौतेली माँ और बहन भी थी।

निशा की सौतेली बहन अंजलि ही थी। निशा अंजलि को अपने सगी बहन के जैसी ही मानती थी। लकिन अंजलि ऐसी नहीं थी वह निशा को सौतेली बहन के साथ ही अपनी दुश्मन भी मानती थी। वही अंजलि की माँ का भावना भी कुछ इसी प्रकार का था।

निशा सुबह उठने के बाद घर का सारा काम किया करती थी। उसके बाद बिना कुछ खाए वह दिन भर गाय और भैस चराने गाँव से बहार जंगल की और जाया करती थी। पूरा दिन वह गाय-भैस को चराती और शाम को फिर से घर का काम करती थी। लेकिन इतना सारा काम करने के बाद वह जब भी खाना खाने बैठा करती थी तब उसकी सौतेली माँ और  बहन उसे खाना सही ने नहीं खाने देती।

निशा को उसकी सौतेली माँ और बहन काफी परेशान किया करती थी। इसके साथ ही वह उसे काफी मारा करती थी। एक बार जब निशा का तबियत बहुत ख़राब हो गया फिर भी उसे घर का सारा काम करना पढता था और गाय-भैस को चराना पड़ता है। जब उसी तबीतय खराब थी और वह गाय-भैस चराने गई थी तब ही उसे एक काफी कमजोर बूढ़ी औरत नजर आई।

वह औरत इस लड़की के पास आई। औरत ने धीमी आवाज ने कहा, हे लकड़ी मेरा गला सूखता जा रहा है। क्यों तुम्हारे पास पानी है। निशा के पास पानी तो नहीं था। लेकिन निशा ने अपनी भैस का दूध निकाल कर उस बूढ़ी औरत को पिने को दिया। बूढ़ी औरत निशा के इस व्यवहार से बहुत खुश हुई। वह औरत वह से चली गई।

अगले दिन वह औरत फिर निशा के पास आई और पीने को पानी मांगा तो निशा ने उसे भैस का दूध दिया। दूध को पीने के बाद वह औरत फिर वहाँ से चली गई। यह बहुत दिन तक चलता रहा। एक दिन निशा की सौतेली माँ ने भैसे के दूध पर ध्यान दिया। तब उसे पता चला कि भैसे पहले से कम दूध दे रही है।

सौतेली माँ ने सोचा की निशा ही दूध पिया कर रही है। इसलिए उसने निशा को खूब मारा और कहा कि अगर अब भैस का दूध कम हुआ तो मैं तुम्हारी जान लेलूगी। आज के बाद तुम गाय-भैस को चराने नहीं जाओगी। अगले दिन निशा गाय-भैस को चराने नहीं गई। बस वह सारा दिन रोती रही। उसने सारा दिन बस काम किया और कुछ भी नहीं खाया।

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रात के समय जब निशा रो रही थी तभी उसके सामने एक रोशनी दिखी। देखती ही देखती वह रोशनी बढती गई। वह उस रोशनी में से एक परी बहार गई। परी कहा, निशा तुम डरो मत है एक परी हु। मैं तुम्हारी मदद करना चाहती हु। तुम मेरी परीक्षा में पास हो गई हो। निशानिशा ने कहा, कैसा परीक्षा? इस पर उस परी ने कहा मैं वही बूढ़ी औरत हु जिसे तुम हर रोज दूध पिलाया करती थी।

आज मैं तुम्हे वरदान देती हूँ कि अब जब भी तुम हसोगी और रोओगी तो तुम्हारे आँख और मुँह से सोने-चांदी गिरा करेंगे। यह कहने के बाद वह परी वह से गयाब ही हो गई। लेकिन यह सब सौतेली माँ ने देख लिया था। सौतेली माँ कमरे में आई और निशा को मारा। जब निशाशा रोने लगी तो उसके मुँह और आँख से सोना-चांदी गिराने लगा। यह देख कर सौतेली माँ चौक गई। अगले दिन सुबह वह अपने बेटी को गाय-भैस को चराने के लिए भेजा। जब अंजलि गाय और भैसा को गाँव से बहार चारा रही थी तभी उसे बूढ़ी औरत नजर आई। वह बूढी औरत अंजलि के पास आकर पीने को पानी मांगा।

अंजलि ना कहा, मेरे पास पानी नहीं है। इस पर बूढ़ी औरत ने कहा, अच्छा बेटी मुझे गाय या भैस का दूध दे दो मैं मर जाऊगी। यह सुनते ही अंजलि को बहुत गुस्सा आ गया। अंजलि ने बूढ़ी औरत को अपने पास से दुत्कारते हुए भगा दिया।

जब शाम को अंजलि घर आई तो उसने माँ से सब कुछ बताया। बूढी औरत के साथ अंजलि का व्यवहार सुनाने के बाद माँ गुस्सा हो गई। गुस्सा के कारण माँ ने अंजलि को एक तमाचा मारा। जब अंजलि रोने लगी तो उसके आँख और मुँह से साँप-मेढ़क और बिच्छू निकलने लगे। यह नजारा देख दोनों ने पागल से ही गई। लेकिन सौतेली माँ समझ गई कि यह सब उस परी का काम है।

बहुत सी परी बहुत अच्छी होती है और वह इंसान की मदद करती है। परी कमजोर और परेशान इंसान की मदद करती है। इसके साथ वह इंसान जो दूसरे किसी इंसान को परेशान करता है तो उसे सबख भी सिखाती है। हमने ऐसी ही परी की कहानियाँ (pari ki kahani in hindi) लिखी है। आपको ऐसी कहानी पढ़ने पर काफी मजा आएगा।

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संगीत और परी की कहानी

fairy tale story
fairy tale story

एक बार की बात है। एक लड़की किसी गांव में रहा करती थी। उस लड़की का नाम था संगीता। उस लड़की के माता पिता नहीं थी। इसलिए वह अपने चाचा और चाची के घर रहा करती थी। उसके चाचा और चाची की खुद की एक लड़की भी थी। वह जितना अपने लड़की को प्यार करते थे उतना ही वह इस बेचारी संगीता से नफरत करती थी। उनके लड़की का नाम था गीता। चाचा-और चाची इस बेचारी संगीता को सारा दिन काम करने को कहती थे।

संगीता सुबह सबसे पहले उठती। सुबह उठने के बाद वह घर का सारा काम करती थी। छोटे काम से लेकर बड़े काम तक। जब वह सारा काम कर लेती तब जाकर उसकी चाची उठती थी। चाची उठने के बाद संगीता के ऊपर खुद चिलाती और उसके काम के कमी गिनती। फिर भी संगीता उनसे कुछ ना कहती। वही गीता जो सुबह कभी 8 बजे उठती तो कभी 10 बजे फिर भी उसे कोई कुछ नहीं बोलता था। वह कुछ भी काम नहीं करती। यह तक की वह अपने काम भी नहीं किया करती थी।

एक बार की बात है। घर पर कुछ मेहमान आये हुए थे। संगीता ने सारा खाना बनाया। लेकिन गलती से खाने में छोटी से कमी हो गई। इस पर संगीता की चाची को बड़ा गुस्सा आ गया। चाची ने सजा के तौर पर उसे घर से भगा दिया। संगीता बहुत रो रही थी। वह कह रही थी कि चाची आपके अलावा मेरा कोई भी नहीं है। मैं कहा जाव और क्या करू।

फिर भी चाची ने उसकी एक बात ना सुनी और उसे घर से बहार कर दिया। संगीता घर से बहार होने के बाद जंगल का रास्ता चुना। वह जंगल में चलती गई। शाम के समय वह जंगल के बिच में पहुंच गई। जंगल ने बीच में उसे एक झोपड़ी दिखी। संगीता मदद के लिए उस झोपड़ी में गई। उस झोपड़ी में एक बूढी औरत थी। उस झोपड़ी औरत ने लड़की से पूछ तुम कौन हो और कहा से आई हो। इस पर संगीता ने अपनी सारी बात बता दिया और रोने लगी। बूढी औरत ने कहा जिसका कोई नहीं होता है उसका ऊपर वह होता है। बूढी औरत ने उस लड़की को अपने झोपड़ी में रख लिया।

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वह लड़की उस बूढ़ी औरत की सारी काम किया करती थी। एक साल बाद बूढ़ी औरत को जानकारी मिली कि राजकुमार के लिए लड़की को खोजा जा रहा है। इस बात को बूढ़ी औरत ने लड़की को बताया और कहा क्या तुम राजकुमारी बनना चाहती हो। इस पर लड़की ने कहा, पर कैसे माँ। बूढ़ी औरत तुरंत के परी में बदल गई। परी बोली, मैं एक परी हूँ।

मैं तुम्हारी ईमानदारी, मेहनत से बहुत ही खुश हो। अब मैं तुम्हे एक राजकुमारी बना दूगी। यह कहने के बाद वह सामान्य लड़की राजकुमार बन गई और उस लड़की की शादी राजकुमार से हो गई। वही संगीता की चाचा और चाची गरीब हो गई। गीता के आलस के कारण उसे बहुत प्रकार की बीमारी भी हो गई।

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परी की छड़ी -pari ki kahani in hindi

Angel stick
परी की छड़ी

एक बार की बात है। कही दूर एक घर में राम नाम का लड़का रहा करता था। राम काफी सीधा लड़का था। राम अपने दोस्त और दुश्मन सभी की मदद किया करता था। एक दिन रात के समय जब राम अपने कमरे में सो रहा था तभी उसे एक आवाज सुनाई दी। वह आवाज थी बचाव-बचाव, मुझे बचाव। यह आवाज सुनने के बाद राम ने अपनी खिड़की से बहार की और देखा तो उसे कुछ नहीं दिखा। उस समय रात के10 बज चुके थे।

फिर से आवाज आने लगी। तो राम से सोचा चलो बहार चल कर देखा जाए। जब वह बहार गया तो उसे कुछ नहीं दिखा। वह फिर से अपने घर की ओर आने वाला था तभी उसे फिर से वही आवाज सुनाई दी। जब उससे उस आवाज की और ध्यान दिया तो उसे एक प्लास्टिक में फसी तितली दिखी। वह तुरंत उसे तितली के पास गया और उसने उस तितली को प्लास्टिक से बहार निकल दिया।

वह तितली बहार निकलते ही एक परी में बदल गई। उस परी ने कहा, राम! तुम्हारे बारे में मैंने काफी कुछ सुन रखा था। लेकिन आज मैंने देख भी लिया कि तुम कितने अच्छे हो और कैसे सभी की मदद करते हो। क्या तुम्हे कुछ उपहार चाहिए। राम ने कहा नहीं, धन्यवाद।

फिर परी ने उस लड़के को एक छड़ी दी। परी ने छड़ी देते हुए कहा, यह लो छड़ी। इसे जब तुम गोल घूमना कर पाने लिए जो माँगोगे वह मिल जाएगा। लेकिन राम ने इसे लेने से मन कर दिया। और अपने घर की ओर चल दिया।

जब वह अपने कमरे में गया तब उसके स्टडी टेबल पर वही छड़ी पड़ी थी। राम अब इस छड़ी को पा कर बहुत खुश हुआ। वह अब जो इस छड़ी से पाना चाहता वह पा लेता। लेकिन राम ने इस छड़ी का प्रयोग कभी बुरे काम के लिए नहीं किया। इस छड़ी से वह बस दूसरों की मदद करता था।

परी की कहानी हिंदी में (pari ki kahani in hindi) पढ़ने पर हमें ज्ञान भी मिलता है। जैसी और सभी कहानी को पढ़ने पर सीख और ज्ञान मिलता है ठीक उसी तरह परी के कहानी (pari ki kahani in hindi) में भी ज्ञान और सीख होता है।

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