अकबर बीरबल की कहानी और कहानियां हिंदी में बच्चों के लिए | akbar birbal stories in hindi

क्या आप भी अकबर और बीरबल की कहानी (Akbar Birbal ki Kahani) को पढ़ना चाहते है। अकबर-बीरबल की कहानिया काफी ज्यादा पढ़ा जाता है।

इसको आज भी काफी मन के साथ पढ़ा जाता है। हमने आपके लिए कुछ अच्छी अकबर और बीरबल की कहानी (Akbar Birbal ki Kahani) लिखी है। जिसको पढ़ने में आपको बहुत ज्यादा मजा आने वाला है।

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लकीर को बिना मिटाये बीरबल ने छोटा किया

एक बार की बात है। बादशाह अकबर ने जमीन पर एक लम्बी सी लकीर को खींचा। इसके बाद बादशाह ने बीरबल से कहा, बीरबल क्या तुम इस लकीर को छोटा कर सकते हो।

बिना इस लकीर को कही से मिटाये। इस पर बीरबल ने कहा, जी हुजूर! मैं ऐसा करनी की कोशिश जरूर करुगा।

बीरबल ने उस लकीर के पास ही एक और लकीर को खींच दिया। जिस लकीर को बीरबल ने खींचा था वह लकीर बादशाह अकबर के लकीर से काफी लम्बी थी।

इसके बाद बीरबल ने अकबर से कहा, देखिये मैंने आपकी खींची लकीर को छोटा कर दिया बिना उसे मिटाये।

यह देखकर बादशाह अकबर बहुत ही खुश हुए। उन्होंने इसके लिए बीरबल को कई उपहार भी दिए।

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बीरबल की बुद्धि का माप

एक बार बीरबल बीमार पड़ गए। बुखार के कारण बीरबल के शरीर में बहुत पीड़ा हो रही थी। बीमार होने के कारण बीरबल कई दिनों से दरबार में नहीं आ पा रहे थे।

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इसको लेकर बादशाह अकबर भी बहुत ज्यादा परेशान थे। वह हर रोज दरबार में बीरबल का इंतजार कर रहे थे। बादशाह अकबर बीरबल से बहुत प्रेम करते थे। एक दिन वह खुद ही बीरबल के घर जा पहुँचे।

जब बादशाह अकबर बीरबल के घर गए। तो उन्होंने देखा कि बीरबल एक खटिया(bed) पर सोए हुए है। बादशाह के आने पर बीरबल की आँख खुल गई।

उन्होंने बादशाह को बैठने को कहा। तभी बीरबल को शौचालय जाना पड़ गया। बीरबल बादशाह को छोड़कर शौचालय चले गए।

बादशाह अकबर ने सोचे। शायद बीमारी के कारण बीरबल का दिमाग कमजोर तो नहीं हो गया है। उनकी बुद्धि पर कोई असर हुआ है या फिर नहीं।

इसको जानने के लिए बादशाह अकबर ने अपने नौकर से कहा, बीरबल के खटिया के पैरो के निचे कागज का टुकड़ा लगा दो।

नौकर ने ऐसा ही किया। उसने खटिया के चारो पैरो के निचे कागज का टुकड़ा लगा दिया। कुछ देर के बाद ही बीरबल शौचालय से आ गए।

जैसे ही बीरबल खटिया पर बैठे तो उन्हें कुछ गड़बड़ लग रही थी। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हुआ है या क्या हो रहा है।

पर फिर भी उन्हें यह तो मालूम था की कुछ तो जरूर है। बादशाह अकबर बीरबल से बात करने लगे। बादशाह अकबर बीरबल के ध्यान को भटकाना चाहते थे। लेकिन बीरबल बात भी कर रहे थे और इधर-उधर देख भी रहे थे।

जब बादशाह अकबर से न रहा गया तो उन्होंने बीरबल से पूछा। बीरबल क्या हुआ है तुम इधर-उधर क्या देख रहे हो?

इस पर बीरबल ने कहा, पता नहीं मुझे क्यों ऐसा लगता है कि मेरा घर एक कागज के बराबर निचे हो गया है या फिर मेरा खटिया एक कागज के बराबर ऊपर हो गया है।

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यह सुनकर बादशाह अकबर समझ गए कि बीरबल की बुद्धि अभी भी कम नहीं हुई है। पर बादशाह अकबर बोले, ऐसा हर किसी के साथ होता है जब वह बीमार होता है।

बीमार होने के कारण तुम्हारा दिमाग भी सही से काम नही कर रहा है। इस पर बीरबल ने कहा, बीमार होने के कारण मेरा शरीर कमजोर हुआ है न कि मेरी बुद्धि।

मेरी बुद्धि अभी भी ठीक से काम कर रही है। यह सुनकर बादशाह अकबर ने कहा, वाह बीरबल वाह! तुमने आज साबित कर दिया कि तुम्हारी बराबरी का कोई भी नहीं है।

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राजा अकबर का गुस्सा

Akabar birbal ki kahani- राजा अकबर का गुस्सा
Akabar birbal ki kahani- राजा अकबर का गुस्सा

राजा अकबर को गुस्सा बहुत जल्दी आता था। अगर उन्हें कोई भी गुस्सा दिला देता तो वे छोटी सी छोटी बात पर बड़ी से बड़ी सजा दे देते थे।

यह बात बीरबल को अच्छी तरह पता था। और सिर्फ वही थे, जो शहंशाह अकबर के गुस्से को शांत कर सकते थे।

एक दिन की बात है। अकबर शहंशाह अपने ख्वाबगाह में पहुंचे, तो देखा कि ख्वाबगाह के चारो दीवारें रंगी है। यह दीवारें बैगनी रंग की रंगी थी।

यह देखकर उन्हें बहुत ही गुस्सा आ गया। उन्होंने सिपाही को बुलाया और पूछा, हमारे ख्वाबगाह के दीवारों के लिए यह रंग किसने चुना है।

सिपाही को डर के मारे आवाज नहीं निकल रही थी। राजा अकबर को और गुस्सा आ गया और बोले, तुम जवाब क्यों नहीं दे रहे हो? तुम्हें कहने को लफ़्ज़ नहीं मिल रहे हैं।

सिपाही ने डरते हुए कहा, “जहांपना, माफी चाहता हूं। यह रंग आपने ही चुना था।”

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राजा अकबर बोले, तुम्हारी यह जुर्रत! हम ऐसा रंग कभी भी पसंद नहीं सकते है और हम से इस तरह से बात कैसे कर सकते हो?

फौरन जाओ और उसको लेकर आओ। जिसने यह दीवारें रंगी है। सिपाही चला गया। कुछ देर बाद सिपाही उस आदमी को लेकर आया।

रंग करने ने वाले ने बादशाह अकबर को सलामी दी। राजा अकबर बोले, तो आ गए तुम!

उस आदमी ने कहा, जहांपनाह! कुछ गलती हुई है क्या? अगर मुझसे कुछ गलती हुई है, तो मैं उसे फौरन सुधार देता हूं।

बादशाह अकबर बोले, फौरन! तुम हमारे ख्वाबगाह के दीवारों का रंग फौरन कैसे बदल सकते हो? बताओ हम जानना चाहते हैं?

वह आदमी डरते हुए बोला, जहांपनाह, अगर आपको यह रंग अब पसंद नहीं है तो मैं इसे रात भर काम करके बदल दूंगा।

बादशाह अकबर बोले, हमें यह रंग बिल्कुल पसंद नहीं है। यह रंग बिल्कुल घटिया है। हमें इस तरह गुस्सा कभी नहीं आता अगर तुम हमारी बात मान लेते और सही रंग का इस्तेमाल करते।

वह आदमी बोला, माफी चाहता हूं। बादशाह अकबर बोले, माफी मांगने से कुछ नहीं होता है। तुम अपने सारे रंग लेकर आओ और उसमें से रंग को मैं पसंद करूंगा।

वह आदमी बादशाह अकबर सलामी देकर चला गया। कुछ देर बाद वह अपने सारे रंगों का मटका ले कर आ गया।

जहांपना अकबर ने सारी रंगों को देखा। उसमें से हरे रंग को पसंद किया। जहांपना अकबर ने उस आदमी से कहा, इस बार कोई गलती नहीं होना चाहिए। वरना मैं तुम्हें यह रंग पीने का आदेश दे दूंगा।

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वह आदमी काफी डर गया। उसने डरते हुए कहा, ठीक है हुजूर, कोई गलती नहीं होगी। वह आदमी सारी रात मेहनत करता रहा। पुराने रंग को को छुड़ाया और नए राम को लगा दिया।

अगले दिन राजा अकबर फिर से ख्वाबगाह में पहुंचे। उन्होंने और ज्यादा गुस्सा आ गया। उन्होंने सिपाही को बुलाया और कहा कि उस रंगरेज को लेकर आओ।

सिपाही चला गया। कुछ देर बाद वह अपने साथ फिर से उस रंगरेज को लेकर आया जो दीवारों को रंग किया था।

वह रंगरेज डरते हुए आया और राजा अकबर को सलामी दी। राजा अकबर ने कहा, जाओ और अपने सारे रंग लेकर आओ। आज जब तुम अपने रंग को पी लोगे तो फिर ऐसी गलती नहीं करोगे।

वह रंगरेज डरते हुए महल से बाहर गया। तभी उसकी मुलाकात बीरबल से हुई। बीरबल ने उसे देखा वह बहुत ही डर हुआ था।

तो बीरबल ने उसके डर का कारण पूछ। इस पर वह रंगरेज ने बीरबल से सारी बात को बताया। इस पर बीरबल ने कुछ देर सोचा और कहा, इस वक्त जहांपना काफी गुस्से में हैं।

और अगर उन्होंने पहले ही कहा है तो वह तुम्हें अपने रंग पीने को जरूर कहेंगे। लेकिन तुम घबराओ नहीं मैं जैसा कहता हूं वैसा करो।

इसके बाद बीरबल ने रंगरेज को अपनी योजना बताई। वह रंगरेज योजना सुनने के बाद बीरबल को सलामी दिया और अपने रंग लाने चल पड़ा।

इधर बादशाह अकबर उस रंगरेज का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। वह रंगरेज अपने सारे रंग लेकर अकबर बादशाह के पास पहुंचा।

अकबर ने कहा, क्या मैंने तुम्हें यह हरा रंग लगाने को नहीं कहा था?

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वह रंगरेज बोला, जी हा, जहांपना। अकबर बोले तो तुमने यह रंग क्यों नहीं लगाया। कोई बात नहीं मैं जानता हूं कि तुम्हें यह रंग कैसे याद रहेगा। एक बार यह रंग पीलोगे तो हमेशा याद रहेगा।

राजा अकबर ने फिर से कहा, इसे रंग के मटके को पियो और जब तक कि हम तुम्हें रुकने को ना कहें तुम रंग को पीते रहना।

वह रंगरेज काफी डरा गया। फिर भी उसने रंग के मटके को उठाया और पीने लगा। कुछ देर बाद अकबर बादशाह ने कहा, रुक जाव! यह रंग पिलाकर हम तुम्हें मारना नहीं चाहते है।

हमें यह उम्मीद है अब तुमने अपना सबक सीख लिया होगा। हम चाहते हैं कि तुम यह रंग लेकर इन दीवारों को रंग दो ।

रंगरेज बोला, जहांपना, अब कोई गलती नहीं होगी। यह कहते हुए। वह रंगरेज चला गया।

राजा अकबर ने सोचा इतना रंग पीने के बाद वह रंगरेज दो से तीन दिन तक बीमार तो रहेगा ही।

अगले दिन जब अकबर ख्वाबगाह में पहुंचे तो उन्होंने देखा कि वह रंगरेज काम कर रहा है यह देखकर वह भौचक्का रह गए।

इस पर अकबर ने रंगरेज से कहा, तुम तो आज पूरा काम खत्म करने वाले थे। और अभी तक तुमने तो पुराना रंग भी नहीं उतारा है।

जाओ और अपना रंग लेकर आओ। वह रंगरेज अकबर बादशाह को सलामी दी और रंगों को लेने चल पड़ा। महल के बाहर निकलने पर रंगरेज ने एक सिपाही से पूछा, जनाब, अभी राजा बीरबल मुझे कहां मिलेंगे?

इस पर उस सिपाही ने कहा, शाही बाग में जाकर ढूंढो। इस वक्त वह वहीं रहते हैं।

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वह रंगरेज बीरबल को ढूढते हु बीरबल के पास पहुंचा और बीरबल से सारी बात बताई। बीरबल ने कहा, डरो मत! मैं तुम्हें जैसा कहता हूं वैसा करो।

इसके बाद बीरबल ने अपनी योजना को बताया। कुछ देर बाद वह रंगरेज बादशाह अकबर के पास पहुंचा। वह बोला, हुजूर में सारा रंग लेकर आया हु।

अकबर ने उस रंगरेज से कहा, आज मैं तुम्हें दुगना सजा दूंगा। अब तुम दो रंगों को पियोगे। वह रंगरेज डरा और एक मटके के रंग को उठाकर पिया।

फिर से दूसरा उठाने जा रहा था। तभी अकबर ने कहा, रुको यह काफी है। दूसरे रंग का मटका मुझे दो। अकबर ने रंग के मटके में अंगुली डाली। तो उन्हें फौरन पता चल गया कि मटके में रंग नहीं बल्कि शरबत है।

अकबर ने रंगरेज को गुस्से से कहा, तुम्हारी यह मजाल। बताओ तुम्हें यह तरीका किसने बताया। उस रंगरेज ने कहा बीरबल ने बता था जहांपनाह।

तभी वहां बीरबल पहुंचे। उन्होंने कहा जहांपनाह मैंने कहा। अकबर ने कहा, हमें समझ जाना चाहिए था कि यह तरकीब आपकी होगी। तभी इसने रंग लाने में देर कर दी कल भी और आज भी।

अकबर बोले, अच्छा यह बताओ तुम्हें कैसे पता चला कि मैं इसे कौन सा रंग पीने को कहूंगा। बीरबल बोला, हुजूर मुझे नहीं पता था कि आप इसे कौन सा रंग पीने को कहेंगे।

इसलिए मैंने इसे अलग अलग रंगों के शरबत को लेने को कहा था। इस पर अकबर काफी हंसे और बोले बहुत खूब बीरबल, तुम ने मेरा गुस्सा शांत कर दिया। और इस आदमी की जान बचाई।

शाबाश! बीरबल शाबाश तुमने मुझे एक बार और गलती करने से बचा लिया। फिर राजा अकबर ने रंगरेज से कहा, और तुम इस बार कोई गलती मत करना। इस बार तुम्हे बीरबल भी नहीं बचा पाएंगे।

इस प्रकार बीरबल ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल कर अकबर शहंशाह का गुस्सा शांत किया और एक आदमी की जान बचाई।

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अकबर बीरबल की कहानियां (akbar birbal kahaniya hindi me ) में बीरबल की बुद्धि को दिखाया जाता है। बीरबल अपनी बुद्धि से बड़ा से बड़ा सवाल हल कर लेते है।

इसके साथ ही अकबर बीरबल की हर कहानी (akbar birbal story in hindi ) में कुछ नया और खास सीखने को भी मिलता है।

इसको देखते हुए हमने यहाँ पर कई अकबर बीरबल की कहानियां (akbar birbal stories in hindi ) लिखी है।

आपको अकबर बीरबल की कहानी कैसी लगी आप हमें कमेंट करके बता सकते है।

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