best real friendship story in hindi सच्ची और अच्छी दोस्ती की कहानी

दोस्ती इंसान के जीवन के एक बहुत ही खास रिश्ता होता है। इंसान के जन्म होते ही उसके साथ कई रिश्ते जुड़ जाती है।

पर दोस्ती का रिश्ता कोई भी इंसान खुद ही बनाता है। यहाँ पर हमने आपके लिए कुछ अच्छी दोस्ती की कहानी लिखा है।

यह दोस्ती की स्टोरी आपको बहुत ज्यादा पसंद आने वाली है। यह सभी दोस्ती की कहानी सच्ची दोस्ती की कहानी में से एक है। इसको पढ़ने के बाद आप अपने दोस्त को जरूर याद करेंगे।

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सच्चे दोस्त की कहानी

real friendship story in hindi
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किसी शहर में सूरज नाम का एक व्यक्ति रहा करता था। इसके पास बहुत ज्यादा धन हुआ करता था। वह अपने पैसो को अपने दोस्तों पर खर्च करना पसंद किया करता था।

सूरज को यह पैसे उसके परिवार से मिला हुआ था। सूरज ने खुद ही यह पैसे नहीं कमाए हुए थे। इसलिए वह अपने दोस्तों पर हद से ज्यादा पैसा खर्च किया करता है।

सूरज के सारे दोस्त मतलबी थे। वह सभी सूरज से पैसो के लिए दोस्ती किये हुए थे। सूरज के दोस्तों में ही एक दोस्त था जिसका नाम दीपक था।

दीपक को सूरज के सभी दोस्त पसंद नहीं किया करते थे। क्योंकि दीपक काफी ईमानदार था। वह सूरज के पैसो को बर्बाद नहीं करता था। दीपक सूरज को भी समय-समय पर बताया करता था कि वह अपने पैसे को इस तरह से बर्बाद न करें।

पर सूरज कहा किसी का सुनने वाला था। सूरज के दोस्त सूरज का कान को भर कर, सूरज और दीपक का दोस्ती ख़त्म करा दिया।

समय बीतता जाता है। अब वह भी समय आ जाता है, जब सूरज का सारा पैसा ख़त्म हो जाता है। धीरे-धीरे सूरज का सारा जमीन भी बिक जाता है।

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अब वह कही का नहीं रहता है। उसके खुद के दोस्तों के सामने हाथ फ़ैलाने का समय आ जाता है। सूरज अपने सारे दोस्तों के पास जाता है मदद के लिए। सूरज के कुछ दोस्त साफ मदद करने के लिए मना कर देते है।

तो वही कुछ सूरज के दोस्त कोई मदद भी नहीं करते पर अपशब्द भी कह देते है। साथ ही सूरज के कुछ ऐसे दोस्त भी थे जो कि सूरज को पहचानने से भी मना कर देते है। अब सूरज को दीपक की कही बात याद आ जाती है। फिर वह वापस लोटता है।

सभी दोस्तों से मिलने के बाद सूरज वापस लौट रहा था तो उसे रास्ते में दीपक मिला। दीपक से सूरज ने रोते हुए माफ़ी मांगा। दीपक से सूरज को गले लगा लिए।

अब दीपक ने सूरज को अपने घर में रखा। उसे हर तरह से मदद किया। सूरज को अपने किये पर बहुत ज्यादा शर्म आता था। वह सोचता था कि वह कैसे अपने सबसे अच्छे और सच्चे दोस्त को छोड़ दिया।

वह कहते है कि सच्चे दोस्त की पहचान बुरे समय में ही होता है। जैसे इस दोस्ती की कहानी में सूरज का सच्चा दोस्त दीपक सूरज को बुरे समय में मदद करता है।

दीपक की मदद और सूरज की कड़ी मेहनत से सूरज फिर से अमीर बन जाता है। अब सूरज को सच्चे दोस्त की पहचान समझ में आ गई थी। साथ ही उसे पैसो का कीमत भी समझ में आ गया था। यह कहानी यही ख़त्म होती है।

इस कहानी से हमें सीख मिलता है कि हमारे बहुत से दोस्त तो होते है लेकिन कुछ ही सच्चे दोस्त होते है। हमें अपने सच्चे दोस्त को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

साथ ही बुरे और मतलबी दोस्त से समय रहते ही दुरी बना लेना चाहिए।

एक अनोखी दोस्ती की कहानी

एक बार की बात है। कही किसी स्कूल में दो लड़के पढ़ा करते थे। पहले लड़के का नाम साहिल था। साहिल पढ़ाई में बहुत ही तेज हुआ करता था। वह अपने क्लास में सबसे आगे बैठा करता था।

स्कूल के सभी टीचर साहिल को पसंद किया करते थे। उसी स्कूल में एक और लड़का पढ़ा करता था जिसका नाम रुर्द्र था। रुर्द्र पढ़ाई में थोड़ा कमजोर था। उसको पढ़ने में दिक्कत हुआ करता था।

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जिसके कारण वह क्लास में पीछे बैठा करता था। वह दोनों एक ही स्कूल में पढ़ा करते थे। एक दिन शाहिल स्कूल से घर जा रहा था तो उसके साथ एक छोटी सी सड़क दुर्घटना ही जाती है।

जिसमे रुर्द्र साहिल की मदद करता है। रुर्द्र साहिल को हॉस्पिटल पहुँचता है। साथ ही उसका सही से इलाज करवाता है।

इसके बाद साहिल और रुद्र एक अच्छे दोस्त बन जाते है। वह स्कूल में एक साथ बैठा करते थे। एक दिन साहिल रुद्र से पूछता है कि रुद्र तुम पढ़ाई क्यों नहीं करते हो?

यह सवाल सुनकर रुद्र की आँख भर आती है। रुद्र साहिल को बताता है कि वह पढ़ना तो चाहता है लेकिन उसको समझ में ही नहीं आता है कि वह पढ़ाई कैसे करे?

साहिल रुद्र को कहता है कि आज से वह रुद्र को पढ़ने में मदद करेगा। साहिल उसी दिन से ही रुद्र को पढ़ाने लगता है।

धीरे-धीरे रुद्र को पढ़ाई समझ में आने लगती है। साहिल रुद्र को रास्ता दिखता जाता है और रुद्र उस रास्ते पर चला जा रहा था।

स्कूल के आखरी परीक्षा में रुद्र अच्छे अंक से पास होता है। इसका कारण साहिल ही होता है। आज भी साहिल और रुद्र एक अच्छे और सच्चे दोस्त है।

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एक सच्चे दोस्त की कहानी

किसी गाँव में दो लड़के रहा करते थे। वह दोनों लड़के ही अच्छे दोस्त थे। एक लड़के का नाम अमन था तो दूसरे का नाम दिनेश था। अमन का परिवार थोड़ा-सा गरीब था। वही दिनेश का परिवार अमीर था।

अमन पढ़ने में अच्छा था। वह अपने स्कूल में टॉप किया करता था। वही दिनेश भी पढ़ने में ठीक ही था, लेकिन वह ज्यादा पढ़ाई करना पसंद नहीं करता था।

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अमन के टीचर कहा करते थे कि अगर अमन का परिवार थोड़ा भी पैसो से अमीर होता तो यह पढ़ाई के दम पर बहुत ही सफल हो सकता है।

अमन के मन में भी यही था कि वह आगे की पढ़ाई करें लेकिन फिर वह अपने घर की हालत देखकर वह उदास हो जाया करता था।

जिसका एक अच्छा दोस्त हो तो उसे कोई भी मुश्किल नहीं हरा सकता है। अमन का भी एक अच्छा दोस्त दिनेश था। कक्षा 12 के बाद अमन को आगे पढ़ाई करने के लिए जाना था लेकिन उसके पास पैसे ही नहीं थे।

दिनेश अमन की मदद करना चाहता था, इसलिए वह अपने परिवार से अमन को मदद करने को कहता है। पहले तो दिनेश का परिवार इसके लिए तैयार नहीं होता है।

लेकिन दिनेश के जिद्द पर उसका परिवार राजी हो जाता है। फिर क्या था अमन पढ़ने के लिए शहर चला गया।

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आपके लिए दोस्ती की कहानी हमने लिखी है। आपको यह कहानी कितनी अच्छी लगी आप हमें बता सकते है। इसके साथ ही आप हमसे अपनी दोस्ती और दोस्त की कहानी भी बता सकते है। आपके दोस्ती की कहानी हमें पढ़ने में अच्छा लगेगा।

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